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जम्मू-कश्मीरः पहाड़ी इलाकों में हिमपात, नदियों में पानी कम होने से बिजली उत्पादन घटा

Tue, 05 Jan 2021 01:02 PM IST
प्रशांत कुमार सतीश वालिया, जम्मू
सतीश वालिया, जम्मू Published by: प्रशांत कुमार Updated Tue, 05 Jan 2021 01:02 PM IST
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Jammu and Kashmir Snowfall in hilly areas reduced water in rivers power generation reduced
पहाड़ी इलाकों में हिमपात - फोटो : बासित जरगर

प्रदेश में पहाड़ी इलाकों में दिसंबर से जमकर हिमपात हो रहा है। बर्फबारी के कारण पहाड़ों पर बर्फ जम चुकी है। इस कारण प्रदेश में नदियों के जलस्तर में भारी गिरावट है। इससे बिजली उत्पादन में कमी आई है। अब केंद्र से खरीदकर प्रदेश में बिजली आपूर्ति करनी पड़ रही है। हर रोज 2500 मेगावाट बिजली केंद्र से ली जा रही है। एक माह में छह करोड़ से ज्यादा की बिजली खरीदारी हो रही है। इसका कारण है कि प्रदेश सरकार द्वारा अलग-अलग नदियों के किनारे लगाए गए बिजली प्रोजेक्टों में उत्पादन काफी कम होना। गर्मी के मौसम में इन प्रोजेक्टों से एक हजार से 1100 मेगावाट बिजली का उत्पादन होता है। सितंबर के बाद उत्पादन में गिरावट आनी शुरू हो जाती है। इस दौरान बारिश उम्मीद से कम होती है।


 

Jammu and Kashmir Snowfall in hilly areas reduced water in rivers power generation reduced
पहाड़ी इलाकों में हिमपात - फोटो : बासित जरगर

नवंबर और दिसंबर माह के बीच बर्फबारी शुरू होने के कारण उत्पादन सिर्फ 150 से 200 मेगावाट हर रोज होता है। इसी तरह केंद्र सरकार के आठ प्रोजेक्टों से गर्मी के मौसम में उत्पादन 2200 मेगावाट के करीब रहता है। मगर नवंबर से फरवरी के बीच उत्पादन सिर्फ 700 से आठ सौ मेगावाट ही रह जाता है। इस कारण सर्दी के मौसम में हर माह करोड़ों की बिजली खरीदनी पड़ती है।

Jammu and Kashmir Snowfall in hilly areas reduced water in rivers power generation reduced
पहाड़ी इलाकों में हिमपात - फोटो : बासित जरगर

सर्दी के मौसम में हीटर, ब्लोअर और अन्य उपकरण चलने के कारण लोड काफी बढ़ जाता है। जम्मू संभाग में 100 मेगावाट बढ़ा है तो कश्मीर में ठंड ज्यादा होने के कारण लोड दो से ढाई सौ मेगावाट तक बढ़ा है। कुल मिलाकर मौजूदा समय में 2550 मेेगावाट बिजली की जरूरत हर रोज हो रही है। जम्मू संभाग में लोड 1050 जबकि कश्मीर में 1200 मेगावाट रहता है।

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Jammu and Kashmir Snowfall in hilly areas reduced water in rivers power generation reduced
पहाड़ी इलाकों में हिमपात - फोटो : बासित जरगर

सलाल में एक, उड़ी में दो, किशन गंगा में एक, दुलहस्ती में दो, लेह में दो बड़े बिजली प्रोजेक्ट काम कर रहे हैं। अतिरिक्त बिजली को दूसरे प्रदेशों में बेचा जाता है। जबकि राज्य के आठ प्रोजेक्टों से भी बिजली पूरी की जाती है। कुल मिलाकर प्रदेश में 3300 मेगावाट बिजली तैयार होती है। इसमें 2300 से 2400 मेगावाट बिजली की खपत प्रदेश में होती है। 1000 मेगावाट बिजली बेची जाती है। इसके एवज में केंद्र और राज्य सरकार को आय होती है।

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Jammu and Kashmir Snowfall in hilly areas reduced water in rivers power generation reduced
पहाड़ी इलाकों में हिमपात - फोटो : बासित जरगर

सर्दी के मौसम में बिजली उत्पादन में काफी गिरावट आती है। नदियों में पानी की कमी हो जाती है। इस कारण 1100 मेगावाट लक्ष्य पर सिर्फ 150 से दो सौ मेगावाट बिजली का उत्पादन हो पाता है। राज्य में बिजली की मांग पूरी करने के लिए अन्य राज्यों से बिजली खरीदी जाती है। हर रोज 2500 मेगावाट बिजली खरीदी जाती है। -पीपी सिंह, एक्सईएन, कामर्शियल विंग, बिजली कॉरपोरेशन

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