जम्मू-कश्मीर में आज ईद-उल-फितर का पर्व मनाया जा रहा है। प्रदेश की प्रसिद्ध और बड़ी मस्जिदों में सन्नाटा पसरा हुआ है। ऐसा दूसरी बार हुआ है जब लोग ईद-उल-फितर की नमाज मस्जिदों में अदा नहीं कर पाए हैं। बीते साल भी कोरोना वायरस के संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए घरों में लोगों ने नमाज अदा की थी।
जम्मू-कश्मीर: आज मनाया जा रहा ईद-उल-फितर का पर्व, मस्जिदों में पसरा हुआ है सन्नाटा
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इस दिन पढ़ी जाने वाली पहली नमाज को सलात अल फज्र कहा जाता है। ईद से पहले हर मुसलमान के लिए फितरा देना फर्ज है। फितरे के तहत प्रति इंसान पौने दो किलो अनाज या उसकी कीमत (तकरीबन 55 रुपये) गरीबों को दी जाती है।
ये इसलिए होता है, ताकि गरीब भी ईद की खुशी मना सकें। कहते हैं कि पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब ने बद्र के युद्ध में फतह हासिल की थी। इस युद्ध में फतह मिलने की खुशी में लोगों ने यह त्योहार मनाना शुरू किया।
पवित्र कुरान पाक के मुताबिक मुकद्दस रमजान माह में रोजे रखने के बाद अल्लाह इस दिन अपने बंदों को बख्शीश और इनाम देते हैं। इसीलिए इस दिन को ईद कहते हैं। मुसलमान ईद पर खुदा का शुक्रिया अदा करते हैं।
बीते साल की तरह ईद की खुशियां कोरोना और लॉकडाउन ने इस बार भी फीकी कर दी हैं। इस पर्व पर बड़े से लेकर छोटे दुकानदारों का व्यापार भी चमक उठता है, लेकिन कोरोना महामारी ने लोगों को घर में कैद कर रख दिया है, जिससे दुकानदारों का कारोबार चौपट हाने के साथ-साथ लोग भी पर्व पर जरूरी सामान की खरीदारी नहीं कर पाए हैं।