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लाहौर बचाने के लिए अखनूर से भागी थी पाकिस्तानी सेना

Tue, 11 Aug 2015 04:05 PM IST
Updated Tue, 11 Aug 2015 04:05 PM IST
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लाहौर बचाने के लिए अखनूर से भागी थी पाकिस्तानी सेना

army celebrates Golden Jubilee of 1965 Indo-Pak war

फतेह चक्क (भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा)। 1965 के भारत-पाक युद्ध हमारी शानदार विजय को 50 साल पूरे हो रहें। सेना स्वर्ण जयंती पर अनेक आयोजन कर रही है।


लाहौर बचाने के लिए अखनूर से भागी थी पाकिस्तानी सेना

army celebrates Golden Jubilee of 1965 Indo-Pak war

इसी क्रम में सोमवार को सेना ने दस्तावेजों के हवाले से बताया कि पाकिस्तान घबराहट में सियालकोट बचाने के लिए अखनूर मोर्चे से पीछे हटा था।


लाहौर बचाने के लिए अखनूर से भागी थी पाकिस्तानी सेना

army celebrates Golden Jubilee of 1965 Indo-Pak war

इस मोर्चे से पाक सेना को पीछे हटाते हुए उसे सियालकोट और लाहौर की हिफाजत में लगा दिया गया था। पाक सेना की साजिश अखनूर पुल पर कब्जा कर घाटी को देश के अन्य हिस्सों से काटने की थी। उसके मंसूबे धरे के धरे रह गए।

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लाहौर बचाने के लिए अखनूर से भागी थी पाकिस्तानी सेना

army celebrates Golden Jubilee of 1965 Indo-Pak war

इस युद्ध में मीरां साहिब ब्रिगेड ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए सबसे पहले पाकिस्तान की पीली पोस्ट, कुंदनपुर तथा अपर औैर डाउन बेंस पर कब्जा जमाया। इसके बाद सियालकोट पर भी कब्जा किया था।

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लाहौर बचाने के लिए अखनूर से भागी थी पाकिस्तानी सेना

army celebrates Golden Jubilee of 1965 Indo-Pak war

इस ब्रिगेड के मौजूदा ब्रिगेडियर एसकेएस चौहान ने सोमवार को फतेह चक्क में 65 की विजय गाथा तथा जवानों की जांबाजी के विषय में बताया कि 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद पाकिस्तान ने तीन मोर्चों पर काम करना शुरू किया।

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