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75 वर्षों बाद कश्मीर में महाकुंभ, इसी संगम पर बहाई गईं थीं नेहरु और इंदिरा की अस्थियां

Wed, 15 Jun 2016 12:53 PM IST
अमृतपाल सिंह बाली, अमर उजाला/श्रीनगर
अमृतपाल सिंह बाली, अमर उजाला/श्रीनगर Updated Wed, 15 Jun 2016 12:53 PM IST
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After 75 years, Kashmiri Pandits celebrated Kumbha Mela in Shadipora
- फोटो : Amar Ujala
कश्मीर घाटी में 75 वर्ष के बाद महाकुंभ का आयोजन मंगलवार को मध्य कश्मीर में गंदरबल जिले के शादीपुरा इलाके में किया गया। इससे पहले यह महाकुंभ 4 जून 1941 को हुआ था जिसमें पूरे भारत से लाखों हिंदू शामिल हुए थे। पाकिस्तान से भी श्रद्धालु आए थे। महाकुंभ में बड़ी संख्या में कश्मीरी पंडितों ने भी भाग लिया। 
After 75 years, Kashmiri Pandits celebrated Kumbha Mela in Shadipora
- फोटो : Amar Ujala

महाकुंभ मेले में श्रद्धालुओं द्वारा श्राद्ध किया गया। उन्होंने संगम में डुबकी भी लगाई। संगम ऐसा स्थान है, जहां सिंधू, झेलम और गुप्त गंगा का मिलन होता है। कश्मीरी पंडित समुदाय के लोग सिंधू को शिव, जबकि झेलम (वितास्ता) को पार्वती मानते हैं। उनके अनुसार माता पार्वती और भगवान शिव का मिलन यहां पर होता है। 

After 75 years, Kashmiri Pandits celebrated Kumbha Mela in Shadipora
- फोटो : Amar Ujala

संगम स्थल पर एक चिनार का पेड़ है, जिसके नीचे शिवलिंग भी है। यहां श्रद्धालु नाव से पूजा करने आते हैं। इसी स्थान पर भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी, अभिनेता शम्मी कपूर के अलावा कई हस्तियों की अस्थियां संगम में बहाई गई हैं। 

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After 75 years, Kashmiri Pandits celebrated Kumbha Mela in Shadipora
- फोटो : Amar Ujala

मेले में आए श्रद्धालुओं में काफी उत्साह था। उनके अनुसार वह अपने आपको खुशकिस्मत मानते हैं कि उन्हें महाकुंभ में शामिल होने का अवसर मिला। कश्मीरी पंडित भरत रैना के अनुसार 75 वर्षों के बाद ऐसा अवसर आया है। जब तक 10 सूत्र एक साथ नहीं मिलते, तब तक ऐसा सौभाग्य नहीं मिलता। 

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After 75 years, Kashmiri Pandits celebrated Kumbha Mela in Shadipora
- फोटो : Amar Ujala

उन्होंने बताया कि जो चिनार का पेड़ है और उसके साथ शिवलिंग है, उसकी काफी मान्यता है। इसका जि़क्र 5000 वर्ष पहले के नीलमत पुराण में भी किया गया है। इस पेड़ की खासियत है कभी भी यह पानी में नहीं डूबा। यहां हम पूर्वजों की अस्थियां बहाया करते थे। हमने प्रार्थना की और यह मांगा कि हम वापस घर लौट पाएं।

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