हिंदी फिल्मों के गीतों में आपने अटूट प्रेम करने वाले लैला और मजनू का जिक्र जरूर सुना होगा, मगर इनकी प्रेम कहानी की पृष्ठभूमि से ज्यादातर लोग मुखातिब नहीं होंगे। आखिर जिनके प्यार की मिसालें दी जाती हैं, वो लैला-मजनू आखिर थे कौन, कहां से थे और कैसी थी उनके प्यार की कहानी, ये जानने के लिए इस वक्त से बेहतर और क्या हो सकता है।
यहां है लैला-मजून की मजार
राजस्थान के श्रीगंगानगर स्थित अनूपगढ़ तहसील में लैला-मजनू की मजारें कई वर्षों से प्रेम और धार्मिक आस्था का प्रतीक होने के चलते लोगों को भाईचारे और सद्भाव से रहने की सीख देती हैं। यहां और भी कई बातें हैं, जो लोगों को आनंदित व रोमांचित करती हैं।
हर साल जून में लगता है मेला
हर साल जून माह में यहां लैला-मजनू मेला भी लगता है, जहां बड़ी संख्या में प्रेमी जोड़े अपने अपने प्यार की सलामती की दुआएं मांगने आते हैं और मजार के सामने मत्था टेककर जीवनभर एक दूजे का साथ निभाने की कसमें भी खाते हैं।
प्यार में सफल नहीं हुए तो यहां आकर दे दी थी जान
लैला-मजनू जीते जी एकदूजे के कभी न हो सके। कालांतर के किस्सों पर गौर करें तो बताया जाता है कि लैला और मजनू ने अपने प्यार में विफल होने पर राजस्थान के इसी गांव में आकर अपनी जान दे दी थी। दोनों की मौत हो जाने के बाद गांववालों ने उन्हें एकदूसरे के पास ही दफना दिया था।
लैला के भाई ने मार डाला था मजनू को
बताया जाता है कि लैला-मजनू पाकिस्तान से थे, जहां सिंध में अरबपति शाह अमारी के बेटे कैस उर्फ मजनू और लैला नाम की गरीब लड़की को आपस में प्रेम हो गया था। कुछ लोगों का मानना है कि लैला के भाई को जब दोनों के प्यार का पता चला, तो उसे बर्दाश्त नहीं हुआ और आखिर उसने निर्ममता से मजनू की हत्या कर दी।