संजय लीला भंसाली की फिल्म 'पद्मावत' देश के कई हिस्सों में रिलीज हुई और राजस्थान समेत कई राज्यों में इसका प्रदर्शन नहीं किया गया है। फिल्म में महारानी पद्मिनी की कहानी को दिखाया गया है। इस कहानी में एक आइने का जिक्र भी है। आइना, जिसके जरिए अलाउद्दीन खिलजी ने रानी पद्मिनी की झलक देखी थी। उसके बाद खिलजी रानी पद्मिनी की अद्भुत सुन्दरता को देखकर मोहित हो गया था और उसने राजा रतन सिंह को कैद कर लिया था। आखिर वो आइना अब कहां है, जिसे लेकर कई बातें छिपी हुई हैं।
खिलजी ने देखी थी पानी में परछाईं
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पद्मावत
- फोटो : अमर उजाला
कहा जाता है कि तब रानी पद्मिनी का महल सरोवर के बीच में था। दीवार पर आइना लगाया गया, रानी को उसके सामने बैठाया गया। आइने से खिड़की के जरिए रानी के चेहरे की परछाई पानी में पड़ी और उनका चेहरा इस तरह अलाउद्दीन खिलजी ने देखा। हांलाकि कहानियों को मनगढ़ंत भी बताया जाता है।
मार्च में तोड़ डाले ये आइने
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टूटे हुए आइने
- फोटो : फाइल फोटो
चितौड़महल में कुछ समय पहले तक ये आइने लगे हुए थे। जिन्हें कुछ युवकों ने तोड़ दिया था। राजस्थान के चित्तौड़गढ़ स्थित ऐतिहासिक पद्मिनी महल में कुछ युवकों ने गत मार्च में ऐतिहासिक आइनों को तोड़ डाला था। इन आइनों को लेकर यह दावा किया जाता है कि इनके जरिए खिलजी ने रानी पद्मिनी को देखा था।
गाइडों ने सुनाई पर्यटकों को ये कहानी
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पद्मिनी महल पर लिखा शिलालेख
- फोटो : अमर उजाला
दूसरी तरफ जानकारों का कहना है कि पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू जब 1955 में चित्तौड़ की यात्रा पर आए थे, तब ये आइने वहां लगवाएं गए थे। इसके बाद यहां इन आइनों को लेकर कहानी तैयार हो गई। इन आइनों को पद्मिनी से जोड़ दिया गया। स्थानीय गाइड भी पर्यटकों को बताने लगे कि यहां एक आइने में अलाउद्दीन खिलजी ने पद्मिनी को निहारा था। इतना ही नहीं पुरातत्व विभाग ने भी यहां शिलालेख पर इन आइनों को लेकर भ्रामक बातें अंकित करवा दी। जबकि उस जमाने में आइने की मौजूदगी को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है।
तब था ही नहीं आइना
उधर इतिहासकारों का कहना है कि जब राजा रतन सिंह राज करते थे तो आइनों का अस्तित्व नहीं था, ऐसे में आइनों से झलक दिखाने की बात पर सवाल खड़े हो जाते हैं। मलिक मोहम्मद जायसी ने पद्मावत लिखा था, लेकिन वो अलाउद्दीन खिलजी के हमले के 237 साल बाद लिखा था। संजय लीला भंसाली ने जब पद्मावती फिल्म की शूटिंग की तो उस वक्त भी इसका विरोध हुआ। इसकी कहानी को लेकर आपत्ति जताई गई। इसके बाद फिल्म को लेकर विवाद लगातार बढ़ता गया। कुछ समय पहले आक्रोशित युवकों ने इन विवादित शीशों को भी तोड़ डाला गया। फिल्म का नाम पद्मावत कर दिया गया।