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यहां साक्षात मौजूद है भगवान शिव का अंगूठा, सैंकड़ों साधु कर रहे यहां गुफाओं में शिव-तपस्या

Mon, 12 Feb 2018 10:50 AM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर Updated Mon, 12 Feb 2018 10:50 AM IST
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maha shivaratri 2018 rajasthan udaipur a lord shiva temple attract pilgrim most
फाइल फोटो।
त्रिनेत्रधारी भगवान शिव की विशेष अराधना दुनिया भर के शिव मंदिरों और शिवालयों में प्रारंभ हो गई। मंगलवार को महाशिवरात्रि का पावन पर्व दुनियाभर में आस्था और श्रद्धा से मनाया जाएगा। इसके लिए शिव भक्तों को भगवान शिव के विशेष मंदिरों में पहुंचना भी प्रारंभ हो गया। ऐसा ही एक विशेष शिव स्थान के बारें में हम आपको बताने जा रहे है जहां भगवान के शिवलिंग की नहीं अतिपु उनके अंगूठे की पूजा होती है। जहां यहां भगवान शिव के अंंगूठे के साक्षात दर्शन किए जा सकते है। इस क्षेत्र का धार्मिक महत्व इतना अधिक है कि इस शिव मंदिर के आसपास के पहाड़ों में सैंकड़ों साधु वर्षों से शिव अराधना में लीन है। 

यहां साक्षात विराजे है शिव

maha shivaratri 2018 rajasthan udaipur a lord shiva temple attract pilgrim most
फाइल फोटो।
भगवान शिव का यह मंदिर अर्धकाशी के नाम से राजस्थान के प्रमुख पर्यटन स्थल माउंट आबू के अचलगढ़ में है। माउंट आबू से करीब 10 किलोमीटर आगे स्थित अचलेश्वर महादेव के दर्शनों के लिए प्रतिदिन हजारों की सख्या में भक्त पहुंचते है। इस जगह के धार्मिक महत्व इतना अधिक है कि महाशिवरात्रि और सावन माह में बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालु यहां रहते है शिव अराधना करते है।

दुनिया का एकलौता मंदिर

maha shivaratri 2018 rajasthan udaipur a lord shiva temple attract pilgrim most
फाइल फोटो।
अचलेश्वर महादेव मंदिर दुनियार का एकलौता मंदिर है जहां शिवलिंग की पूजा नहीं होती है। यहां साक्षात भगवान शिव का अंगूठा विद्यमान है। पौराणिक कथाओं के अनुसार जब अबुर्द पर्वत पर स्थित नंदीवर्धन हिलने लगा तो हिमालय में तपस्या कर रहे भगवान शिव की तपस्या भंग हुई। क्योंकि इसी पर्वत पर भगवान शिव का प्यारा नंदी भी था। नंदी को बचाने के लिए भगवान शिव ने हिमालय से ही अपने पांव का अंगूठा फैलाया और पर्वत को स्थिर कर दिया। जहां आज अचलेश्वर मंदिर है यह पूरा क्षेत्र अर्बुदाचंल के नाम से जाना जाता था। 
 
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आज भी शिव करते है भ्रमण

maha shivaratri 2018 rajasthan udaipur a lord shiva temple attract pilgrim most
अचलेश्वर महादेव
इस पूरे क्षेत्र में स्थित गुफाओं में सैंकड़ों की संख्या में साधु-सन्यासी आज भी भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए वर्षों तक तपस्या करते है। मंदिर से जुड़े लोगों का कहना है कि भगवान शिव आज भी अपने भक्तों को दर्शन देते है। स्कंद पुराण के अर्बुद खंड में इस बात का उल्लेख भी है कि भगवान शंकर और भगवान विष्णु एक पूरी रात अर्बुद पर्वत की सैर करते है।
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आज भी इस बात का रहस्य

maha shivaratri 2018 rajasthan udaipur a lord shiva temple attract pilgrim most
फाइल फोटो।
अचलेश्वर महादेव मंदिर में भगवान शिव के अंगूठे पर जो जल चढ़ाया जाता है वह कहां जाता है यह आज भी रहस्य बना हुआ है। जानकारी के अनुसार 15वीं शताब्दी में अचलगढ़ पहाड़ी के तल पर इस मंदिर का निर्माण कराया गया था। इस पहाड़ी पर ही अचलगढ़ का प्रसिद्ध किला है जिसका निर्माण राणा कुंभा ने कराया था। अचलेश्वर महादेव मंदिर के गर्भगृह में दशावतार की मूर्तियां भी स्थापित है। 
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