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दुनिया भर से लाखों लोग पहुंचते हैं इस दरबार में, जानें क्यों कहते हैं उन्हें 'शीश का दानी'
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Sun, 18 Feb 2018 06:53 PM IST
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खाटू श्याम
- फोटो : फाइल फोटो
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खाटू श्याम के दरबार में लाखों भक्तों का पहुंचना शुरू हो गया है। खाटू श्याम बाबा के नाम से प्रसिद्ध धाम से जुड़ी एक खास कहानी है। इसी कहानी की वजह से उन्हें 'शीश के दानी' के नाम से प्रसिद्धि मिली है।
भीम के पोते थे बर्बरीक
खाटू श्याम
- फोटो : फाइल फोटो
खाटू श्याम के सामने लाखों भक्त झोली फैलाते हैं। अपनी कामना मांगते हैं। कहा जाता है कि महाभारत के दौरान भगवान कृष्ण ने उनसे उनका सिर दान में मांग लिया था। खाटू श्याम बर्बरीक को कहा जाता है। वे पांडव भीम के बेटे घटोत्कच के बेटे थे।
किया ऐसा कमाल की कृष्ण भी चौंक गए थे
खाटू श्याम
- फोटो : फाइल फोटो
कहा जाता है कि बर्बरीक ने अपने एक तीर के कमाल से भगवान कृष्ण, कौरवों व पांडवों को हतप्रभ कर दिया। उन्होंने साथ में यह भी कह दिया था कि मैं उसी की मदद करुंगा जो हार रहा होगा। पांडवों की जीत निश्चित करने के लिए कृष्ण ने बर्बरीक से एक दान मांग लिया। दरअसल, बर्बरीक ने अपने एक तीर से एक पीपल के जमीन पर बिखरे सारे पत्तों को बींध कर दिखा गया। इसमें वो पत्ते भी शामिल थे जिन्हें भगवान कृष्ण ने अपने पैर के नीचे और हाथ में छिपा रखा था।
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भगवान पहुंचे थे याचक बनकर
खाटू श्याम धाम में भक्त
- फोटो : फाइल फोटो
ऐसे अद्भुत शौर्य को देखकर कृष्ण थोड़े चिंतित हो गए। अगले दिन याचक के रूप में बर्बरीक के पास पहुंचे। वहां जाकर दान की याचना की। बर्बरीक ने कहा कि आप मांगों मैं प्राण भी दान में दे दे सकता हूं। भगवान कृष्ण ने जब प्राण ही दान देने के लिए कहा तो बर्बरीक ने कहा कि आप कोई सामान्य याचक नहीं हैं, बताइए आप कौन हैं?
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जताई अपनी यह इच्छा
खाटू धाम
- फोटो : फाइल फोटो
तब बर्बरीक ने सिर दान करने से पहले अपनी एक ही इच्छा प्रकट की। उन्होंने कहा कि मैं महाभारत का महायुद्ध देखना चाहता हूं। दुनिया के सारे वीर इसमें शामिल हुए हैं। कृष्ण ने उनकी ये इच्छा पूरी की और दिव्य औषधि की मदद से जीवित रखते हुए उसी पीपल के पेड़ की सबसे ऊंची शिखा पर टिका कर रख दिया।