Indian Army ने पाकिस्तान बॉर्डर के पास दुश्मन के ठिकानों को किया नेस्तनाबूद
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भारतीय सेना ने यहां पाकिस्तान बॉर्डर से सटे इलाकों में अपनी वीरता और अदम्य साहस दिखाया। सेना के जवानों ने पूरी तत्परता से यहां दुश्मन के ठिकानों पर हमला कर उन्हें जड़ से उखाड़ फेंका।
दरअसल, हम यहां बात कर रहे हैं बॉर्डर इलाके में करीब 100 किलोमीटर तक भारतीय सेना की दक्षिण कमान की ओर से चलाए गए 'हमेशा विजयी' युद्धाभ्यास की, जो आज पूरा हुआ। इस दौरान थल और वायुसेना ने अपने साहस और हथियार चलाने की कुशलता का परिचय दिया।
'हमेशा विजयी' युद्धाभ्यास 16 दिसंबर को शुरू हुआ था। बाड़मेर फील्ड में सेना का टी-90 भीष्म टैंक दुश्मनों के ठिकानों पर जमकर गरजा और उन्हें नेस्तनाबूद कर दिया। युद्धभ्यास में वायुसेना के जांबाजों ने पैरा ड्रोपिंग की शानदार झलक पेश की।
पैरा ड्रोपिंग की शानदार झलक
सेना के साथ वायुसेना ने संयुक्त तौर पर टैंक, बख्तरबंद गाड़ियों और विमानों का इस्तेमाल कर आपसी तालमेल से लक्ष्य अर्जित किया। सेना के टैंकों ने दुश्मन के ठिकानों पर गोले बरसाए।
युद्धाभ्यास की झलक देखने के लिए यहां थल सेनाध्यक्ष बिपिन रावत भी पहुंचे। सेनाध्यक्ष ने नए साल में बाड़मेर-जैसलमेर में सेना भर्ती रैली करने की भी बात कही।
थल सेनाध्यक्ष बिपिन रावत ने जवानों की सतर्कता और युद्ध कौशल देखकर कहा कि युद्धाभ्यास में दुश्मन के क्षेत्रों की गहराई में जाकर सशस्त्र बलों की क्षमता को आंका जा रहा है। सेनाध्यक्ष ने युद्ध की तैयारी और आॅपरेशनल युद्धाभ्यास के साथ योजना बनाने के लिए सेना की सराहना की।
टैंक और बख्तरबंद गाड़ियों ने बरसाए गोले
रक्षा विभाग के प्रवक्ता ले. कर्नल मनीष ओझा ने बताया कि युद्धाभ्यास में सर्विलेंस नेटवर्क की मदद से सटीक हमले और संयुक्त संचालन पर आधारित सामरिक उपकरणों का भी परीक्षण किया गया है। साथ ही, भविष्य की जरूरतों को देखते हुए सैनिकों को रासायनिक और हवाई हमले के बारे में भी ट्रेनिंग दी गई।
थल सेनाध्यक्ष बिपिन रावत ने मीडिया से कहा कि कश्मीर में दस हजार युवा पत्थरबाजी में लिप्त थे, जिनमें चार हजार युवा ऐसे हैं जिन्होंने केवल एक बार पत्थरबाजी की। इन युवाओं को यह पता नहीं था कि वे किस कारण पत्थरबाजी कर रहे हैं। ऐसे एक बार पत्थरबाजी करने वाले युवाओं के खिलाफ मुकदमे वापस लिए गए हैं।