बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने रविवार को अजमेर में सूफी संत ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में हाजिरी दी। उन्होंने भारत—बांग्लादेश के संबंधों में प्रगाढ़ता एवं अमन-चैन की दुआ मांगी। शेख हसीना प्रतिनिधि दल के साथ अजमेर पहुंची। यहां घूघरा एयरपोर्ट पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने इनका जोरदार स्वागत किया। सभी ने उन्हें बुके भेंटकर भारत आने के लिए धन्यवाद दिया।
ढोल—नगाड़ें बजते देख खुश हुई हसीना
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बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना
- फोटो : amar ujala
अजमेर पहुंचने पर राजस्थानी पोशाक पहने लोगों ने ढोल नगाड़ें बाजकर उनका स्वागत किया। इतना जोरदार स्वागत देखकर हसीना प्रफुल्लित हो गई। इसके बाद जब दरगाह पहुंची तो वहां भी उनका रेड कारपेट बिछाकर अभिनन्दन किया गया। उनके आने से पहले पूरे दरगाह परिसर को खाली कराया गया।
दरगाह में माथा टेक चादर पेश की
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बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना
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हसीना ने सूफी संत ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में माथा टेका एवं चादर पेश की। यहां उन्होंने अमन-चैन व दोनों देशों के संबंधों में मजबूती की दुआ मांगी। उनके साथ आए प्रतिनिधि मण्डल ने भी मजार शरीफ पर अकीदत के फूल पेश किए। ख्वाजा की दरगाह में भी बांग्लादेश की प्रधानमंत्री का दरगाह की परम्परा के अनुसार स्वागत किया गया।
सम्मान में पत्र पढ़कर सुनाया गया
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दरगाह के मुख्य द्वार पर दरगाह दीवान जैनुअल आबेदीन, दरगाह नाजिम कर्नल मंसूर अली खान, सहायक नाजिम मोहम्मद आदिल, अंजुमन के पदाधिकारी प्रतिनिधि एवं खादिम कलीमुद्दीन चिश्ती सहित अन्य खादिमों ने उनका इस्तकबाल किया। दरगाह की ओर से उन्हें प्रतीक चिन्ह भी भेंट किया गया। अंजुमन कमेटी द्वारा भी सम्मान पत्र पढ़कर सुनाया तथा उन्हे भेंट किया।
विजिट बुक में लिखा संदेश
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बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना
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बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अंजुमन की विजिट बुक में बांग्ला भाषा में अपना संदेश भी लिखा। उन्होंने लिखा यह अल्लाह के वली का दरबार है। यहां आने से रूहानी फैहज मिलता है। दिल को सुकून मिलता है। यहां जो भी आता है, अपनी मुरादें पाता है। इनके दरबार में आने से अल्लाहताला हम सभी की दुआएं कबूल करता है।