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एक्सक्लूसिव: देश के टॉप IAS, IPS, IRS और IFS जिनकी किस्मत विवेकानंद की वजह से पलटी

Sat, 11 Jan 2020 08:50 PM IST
Rama Solanki रमा सोलंकी
Updated Sat, 11 Jan 2020 08:50 PM IST
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You won't believe how Vivekanand changed  the lives of these 20 VIPs
स्वामी विवेकानंद जयंंती 2020 - फोटो : Amar Ujala
अमेरिका में कुछ पत्रकार एक भारतीय संत से सवाल कर रहे थे- आपके देश में किस नदी का जल सबसे अच्छा है? स्वामी जी बोले- यमुना। पत्रकार ने कहा आपके देशवासी तो बोलते हैं कि गंगा का जल सबसे अच्छा है। स्वामी जी का उत्तर था - कौन कहता है गंगा नदी हैं, वो तो हमारी मां हैं। वही स्वामी विवेकानंद जिन्हें पूरी दुनिया में उनके ज्ञान, वक्तव्य और स्मरण शक्ति के लिए जाना जाता है। आपको ये जानकर हैरानी हो सकती है कि यूनिवर्सिटी की प्रवेश परीक्षा में उन्हें महज 47 प्रतिशत अंक मिले थे। वहीं एफए (बाद में इंटरमीडिएट) में उन्हें 46 प्रतिशत और बीए में 56 प्रतिशत अंक मिले थे। इसी 46 प्रतिशत अंक वाले विद्यार्थी के लिए ना केवल शिकागो ने खड़े होकर ताली बजायी थी बल्कि गुरूदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने भी उनके बारे में कहा था- “यदि आप भारत को जानना चाहते हैं, तो विवेकानंद को पढ़िये। उनमें आप सब कुछ सकारात्मक ही पाएंगे, नकारात्मक कुछ भी नहीं। आज जो युवा पूरे देश की प्रेरणा हैं और देश के प्रशासन को बखूबी संचालित कर रहे हैं, उनकी प्रेरणा रहे स्वामी विवेकानंद, सफलता पाने के लिए उन्होंने याद कर लीं विवेकानंद की ये अनमोल बातें।  

 

देश की सर्वोच्च सेवाओं से जुड़े लोगों की स्वामी विवेकानंद ने कैसे बदली तकदीर। कैसे उन्हीं के बताए रास्ते पर चलकर वे बने देश के 'कर्णधार' और बदल रहे मुल्क की तस्वीर। जानिए ऐसे ही अधिकारियों की जुबानी।

निराशा-हताशा होने पर विवेकानंद के बारे में सोचता हूं: प्रणेश गुप्ता, आईआरएस

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स्वामी विवेकानंद जयंंती - फोटो : Amar ujala

मेरे लिए विवेकानंद ऊर्जा, शक्ति और प्रकाश के वो ज्योतिर्मयी दिव्य पुन्ज हैं, जो वर्तमान परिस्थितियों में और अधिक प्रासंगिक और अधिक नवीन होते परिलक्षित होते हैं। कार्य क्षेत्र में कभी-कभी निराशा और हताशा का संचार होने लगता है तो मैं विवेकानंद के बारे में सोचता हूँ; उनकी आवाज कानों में गूंजने लगती है-
"उठो, जागो और तब तक नहीं रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाये"। और चमत्कार की तरह एक नयी स्फूर्ति और उत्साह का संचार मन में होने लगता है, निराशा त्यागकर मैं फिर से अपने कर्तव्य की तरफ पूरी सकारात्मकता से आगे बढ़ जाता हूं।
-प्रणेश गुप्ता, भारतीय राजस्व सेवा


 

वे आध्यात्मिकता को राष्ट्रीयता से जोड़ने वाले पहले व्यक्ति थे: राजेंद्र कुमार शांडिल्य, आईएएस

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स्वामी विवेकानंद - फोटो : Amar Ujala

स्वामी विवेकानंद ने इस राष्ट्र की चेतना को जगाने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। वे आध्यात्मिकता को राष्ट्रीयता से जोड़ने वाले पहले व्यक्ति थे और युवाओं को राष्ट्र निर्माण का स्पष्ट आह्वान दिया। उनके शब्दों में, स्वामी विवेकानंद ने कहा कि राष्ट्र के युवा, "'उत्तिष्ठ, जागृत, प्राप्य वरान्निबोधत।'" का अर्थ है, उठो, जागो और अपने पथ पर स्वयं निर्देशित हो। इन शब्दों के बिना भारत कुछ और शताब्दियों तक सो रहा होता जब तक कि कुछ विवेकानंद उसे नहीं जगाते।
-राजेंद्र कुमार शांडिल्य, भारतीय प्रशासनिक सेवा

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युवाओं को विवेकानंद का अध्ययन अवश्य करना चाहिए: सुभाष चंद्र दुबे, आईपीएस

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स्वामी विवेकानंद - फोटो : Amar Ujala

भारत आज दुनिया का सबसे युवा देश है, भारत की बड़ी युवा आबादी, हमारी सबसे बड़ी संभाव्यता है। बस युवाओं को सही दिशा और प्रेरणा की आवश्यकता है। ऐसे में विवेकानंद और भी अधिक प्रासंगिक हो उठते हैं, युवाओं को विवेकानंद का अध्ययन अवश्य करना चाहिए।
जब आज के संदर्भों में युवाओं की भूमिका को सोचता हूँ तो ध्यान में आता है भारत को किस तरह की युवा शक्ति की आवश्यकता है?
क्या हमें नशे की पिनक में गुमराह, चंद नारे लगाकर क्रांति महसूस करने वाली युवा शक्ति चाहिए ? क्या हमें हिंसा और पथराव के रास्ते पर अपनी शक्ति को व्यर्थ कर देने वाला युवा चाहिए? क्या हमें विभिन्न राजनैतिक/जातिगत विचारधाराओं की अंधभक्ति करने वाले अतार्किक युवाओं के समूह चाहिए? इन सबका जवाब मिलता है विवेकानंद जी में। उनके द्वारा युवाओं का आह्वान, उन्होंने युवाओं को भारत का भविष्य बताया।  
-सुभाष चंद्र दुबे, भारतीय पुलिस सेवा

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युवाओं को सकारात्मक प्रेरणा मिलती है : रघुनाथ भारती, आईआरएस

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स्वामी विवेकानंद - फोटो : Amar Ujala

निश्चित रूप से वर्तमान परिस्थितियों में युवाओं को सकारात्मक प्रेरणा देने के लिए, उनकी अथाह शक्ति को सही दिशा देने के लिए स्वामी विवेकानंद को आज के परिपेक्ष्य में समझना होगा। जब वो कहते थे कि मैं 100 युवा फुटबॉल खिलाड़ियों का साथ लेकर देश को बदल सकता हूँ; तो इसका अर्थ है कि इस देश को टीम भावना से, मिलजुलकर, एक दूसरे को लक्ष्य (गोल) की तरफ अग्रसर करने वाले युवाओं का समूह चाहिए।
- रघुनाथ भारती, भारतीय राजस्व सेवा

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