एक्सक्लूसिव: देश के टॉप IAS, IPS, IRS और IFS जिनकी किस्मत विवेकानंद की वजह से पलटी
निराशा-हताशा होने पर विवेकानंद के बारे में सोचता हूं: प्रणेश गुप्ता, आईआरएस
मेरे लिए विवेकानंद ऊर्जा, शक्ति और प्रकाश के वो ज्योतिर्मयी दिव्य पुन्ज हैं, जो वर्तमान परिस्थितियों में और अधिक प्रासंगिक और अधिक नवीन होते परिलक्षित होते हैं। कार्य क्षेत्र में कभी-कभी निराशा और हताशा का संचार होने लगता है तो मैं विवेकानंद के बारे में सोचता हूँ; उनकी आवाज कानों में गूंजने लगती है-
"उठो, जागो और तब तक नहीं रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाये"। और चमत्कार की तरह एक नयी स्फूर्ति और उत्साह का संचार मन में होने लगता है, निराशा त्यागकर मैं फिर से अपने कर्तव्य की तरफ पूरी सकारात्मकता से आगे बढ़ जाता हूं।
-प्रणेश गुप्ता, भारतीय राजस्व सेवा
वे आध्यात्मिकता को राष्ट्रीयता से जोड़ने वाले पहले व्यक्ति थे: राजेंद्र कुमार शांडिल्य, आईएएस
स्वामी विवेकानंद ने इस राष्ट्र की चेतना को जगाने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। वे आध्यात्मिकता को राष्ट्रीयता से जोड़ने वाले पहले व्यक्ति थे और युवाओं को राष्ट्र निर्माण का स्पष्ट आह्वान दिया। उनके शब्दों में, स्वामी विवेकानंद ने कहा कि राष्ट्र के युवा, "'उत्तिष्ठ, जागृत, प्राप्य वरान्निबोधत।'" का अर्थ है, उठो, जागो और अपने पथ पर स्वयं निर्देशित हो। इन शब्दों के बिना भारत कुछ और शताब्दियों तक सो रहा होता जब तक कि कुछ विवेकानंद उसे नहीं जगाते।
-राजेंद्र कुमार शांडिल्य, भारतीय प्रशासनिक सेवा
युवाओं को विवेकानंद का अध्ययन अवश्य करना चाहिए: सुभाष चंद्र दुबे, आईपीएस
भारत आज दुनिया का सबसे युवा देश है, भारत की बड़ी युवा आबादी, हमारी सबसे बड़ी संभाव्यता है। बस युवाओं को सही दिशा और प्रेरणा की आवश्यकता है। ऐसे में विवेकानंद और भी अधिक प्रासंगिक हो उठते हैं, युवाओं को विवेकानंद का अध्ययन अवश्य करना चाहिए।
जब आज के संदर्भों में युवाओं की भूमिका को सोचता हूँ तो ध्यान में आता है भारत को किस तरह की युवा शक्ति की आवश्यकता है?
क्या हमें नशे की पिनक में गुमराह, चंद नारे लगाकर क्रांति महसूस करने वाली युवा शक्ति चाहिए ? क्या हमें हिंसा और पथराव के रास्ते पर अपनी शक्ति को व्यर्थ कर देने वाला युवा चाहिए? क्या हमें विभिन्न राजनैतिक/जातिगत विचारधाराओं की अंधभक्ति करने वाले अतार्किक युवाओं के समूह चाहिए? इन सबका जवाब मिलता है विवेकानंद जी में। उनके द्वारा युवाओं का आह्वान, उन्होंने युवाओं को भारत का भविष्य बताया।
-सुभाष चंद्र दुबे, भारतीय पुलिस सेवा
युवाओं को सकारात्मक प्रेरणा मिलती है : रघुनाथ भारती, आईआरएस
निश्चित रूप से वर्तमान परिस्थितियों में युवाओं को सकारात्मक प्रेरणा देने के लिए, उनकी अथाह शक्ति को सही दिशा देने के लिए स्वामी विवेकानंद को आज के परिपेक्ष्य में समझना होगा। जब वो कहते थे कि मैं 100 युवा फुटबॉल खिलाड़ियों का साथ लेकर देश को बदल सकता हूँ; तो इसका अर्थ है कि इस देश को टीम भावना से, मिलजुलकर, एक दूसरे को लक्ष्य (गोल) की तरफ अग्रसर करने वाले युवाओं का समूह चाहिए।
- रघुनाथ भारती, भारतीय राजस्व सेवा