देश के 14वें राष्ट्रपति के रूप में रामनाथ कोविंद ने आज राष्ट्रपति भवन में प्रवेश कर लिया। बेहद कम लोग ही इस बात से वाकिफ होंगे की राष्ट्रपति रहने के लिए इस भवन के मुख्य कक्ष का नहीं अतिथि गृह का उपयोग करते हैं। जानिए क्या है वजह?
असल में आजादी से पहले राष्ट्रपति भवन को वायसराय हाउस और 1950 तक गर्वनमेंट हाउस कहा गया। आजादी के बाद देश के पहले गर्वनर जनरल सी राजगोपालाचारी इसमें रहने के लिए आए। उन्हें रुकने के लिए इस भवन के मुख्य कक्ष में ले जाया गया, जिसे तब बेडरूम कहा जाता था। कहा जाता है इस कक्ष के आडंबर देखकर राजगोपालाचारी का मन यहां रहने का नहीं हुआ। इसके बाद उनके रुकने का इंतजाम दूसरे कक्ष में किया गया।
लेकिन उस कक्ष में भी वही तामझाम था, यह जगह भी उन्हें पसंद नहीं आई। जिसके बाद कुछ समय के लिए उनके रहने की व्यवस्था अतिथि भवन में की गई। राजगोपालचारी को वह अतिथि भवन इतना पसंद आया कि उन्होंने वहीं रहने की इच्छा जताई, जिसके बाद वहीं उनके स्थायी रूप से रहने का इंतजाम किया गया। बस इसी के बाद से यह पंरपरा पड़ गई और यहां आने वाले तमाम राष्ट्रपति अतिथि भवन में रहते चले आए। हालांकि उनके उपयोग के लिए भवन के अधिकतर कमरे खोल दिए जाते हैं लेकिन ज्यादा उपयोग अतिथि भवन का ही होता है। चलिए अब हम आपको रूबरू कराते हैं राष्ट्रपति भवन के अंदर के आलीशान नजारों से।
ये है राष्ट्रपति भवन के अतिथि कक्ष का शानदार गलियारा।
इस कक्ष को कहा जाता है मैसूर बेडरूम। साधारण साज सज्जा वाले कक्ष का उपयोग राष्ट्रपति कभी कभार ही करते हैं।