कांग्रेसी नेता नाना पटोले रविवार को निर्विरोध महाराष्ट्र विधानसभा के अध्यक्ष चुन लिए गए हैं। पटोले पीएम नरेंद्र मोदी के विरोध के बाद सुर्खियों में आए थे। इसी कारण उन्होंने भाजपा को छोड़ कांग्रेस का दामन थाम लिया था।
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नाना पटोले
- फोटो : Social Media
बागी नेता के तौर पर अपनी छवि बनाने वाले पटोले कई पार्टियों में अपनी राजनीति को चमका चुके हैं। उन्होंने शिवसेना के नेता के तौर पर भी काम किया है।
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पीएम मोदी के साथ नाना पटोले
- फोटो : Social Media
2014 का लोकसभा चुनाव नाना पटोले ने भाजपा के टिकट पर लड़ा था और एनसीपी के प्रफुल्ल पटेल को हराया था। लेकिन पीएम मोदी के खिलाफ लगातार बयान देने के कारण भाजपा ने इन्हें अलग-थलग कर दिया। जिसके बाद इन्होंने भाजपा को छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया था।
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नाना पटोले
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शिवसेना छोड़ कांग्रेस में हुए शामिल
पटोले 90 के दशक में शिवसेना को छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए थे। 1992 में भंडारा जिला परिषद के चुनाव में पटोले को कांग्रेस ने टिकट नहीं दिया। तब इन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़कर पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी मधुकर लीचड़े को हराया।
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नाना पटोले
- फोटो : Nanabhau Falgunrao Patole Facbook
कांग्रेस से बगावत और घर वापसी का लंबा सिलसिला
हालांकि कुछ दिनों में उनकी पार्टी में वापसी हो गई लेकिन 1995 विधानसभा चुनाव के दौरान राज्य के नेतृत्व से नाराज होकर इन्होंने फिर बगावत का झंडा बुलंद किया।