तीन दशक के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार देश में ही बने हल्के लड़ाकू विमान तेजस की पहली स्क्वाड्रन को वायुसेना में शामिल किया गया है। पहली खेप में दो विमान वायुसेना में शामिल किए गए हैं। सरकारी कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) ने यहां ‘एयरक्राफ्ट सिस्टम टेस्टिंग इस्टैबलिशमेंट’ में एक कार्यक्रम के दौरान वायुसेना के दो तेजस विमान सौंपे। पहली स्क्वाड्रन को ‘फ्लाइंग डैगर्स’ नाम दिया गया है। विधिवत पूजा पाठ के साथ इन दोनों विमानों को शामिल किया गया। पूजा में पंडित के साथ साथ अफसर भी बैठे।
लंबे इंतजार के बाद देशी लड़ाकू विमान तेजस वायुसेना में शामिल
विमानों को वायुसेना में शामिल किए जाने के समारोह के दौरान कमांडिंग ऑफिसर ग्रुप कैप्टन माधव रंगचारी ने एक तेजस विमान को उड़ाया। इस समारोह में दक्षिणी वायु कमान के एयर ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ एयर मार्शल जसबीर वालिया और एचएएल के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। इस हल्के लड़ाकू विमान का विकास तीन दशक से अधिक समय पहले शुरू हुआ था। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने विमान का नाम ‘तेजस’ रखा था।
लंबे इंतजार के बाद देशी लड़ाकू विमान तेजस वायुसेना में शामिल
यह स्क्वाड्रन पहले दो वर्ष बेंगलुरू में रहेगा और इसके बाद इसे तमिलनाडु के सुलूर भेजा जाएगा। वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अरूप राहा ने इस उपलब्धि को देश और वायुसेना के लिए बेहतर बताया। उन्होंने इसी साल 17 मई को तेजस से पहली उड़ान भरी थी। वायुसेना ने इस वित्तीय वर्ष में 6 और अगले वित्त वर्ष में करीब आठ तेजस विमानों को शामिल करने की योजना बनाई है।
लंबे इंतजार के बाद देशी लड़ाकू विमान तेजस वायुसेना में शामिल
वायुसेना के मुताबिक उसकी अगले साल की योजनाओं में तेजस मुख्य रूप से शामिल होगा और साथ ही उसे कई चुनौती भरे इलाकों में भी तैनात किया जाएगा। दरअसल, तेजस विमान धीरे धीरे वायुसेना में मिग-21 विमानों की जगह ले लेंगे।
लंबे इंतजार के बाद देशी लड़ाकू विमान तेजस वायुसेना में शामिल
रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने इस महीने की शुरूआत में कहा था, ‘मुझे लगता कि अगले साल दो साल में मिग-21 स्क्वाड्रन को हटाया जाएगा। शुरूआत में इनके स्थान पर यह विमान शामिल होगा।’ उन्होंने कहा था, ‘हल्के लड़ाकू विमान उन मिग विमानों से बेहतर हैं जो पुराने हो चुके हैं और उनके कल-पुर्जें मिलने में भी दिक्कत होती है।’