अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की सात महिलाओं को अपना ट्विटर अकाउंट सौंपा है। जिसमें से पहली महिला का नाम स्नेहा मोहनदास है। जो बेघर लोगों को खाना खिलाने के लिए फूडबैंक इंडिया नाम का अभियान चलाती हैं। दूसरी महिला मालविका अय्यर हैं जिन्होंने 13 साल की उम्र में एक बम धमाके में अपने दोनों हाथ गंवा दिए। तीसरी महिला कश्मीर की आरिफा हैं। जिन्होंने अपने राज्य के खत्म होते शिल्प को पुनर्जीवित करने का बीड़ा उठाया है। चौथी महिला कल्पना रमेश हैं जो जल संचयन का कार्य करती हैं। पांचवी महिला का नाम विजया पवार है। वह महाराष्ट्र के बंजारा समुदाय की हैं। छठवीं महिला कलावती देवी हैं, वह कानपुर की रहने वाली हैं। सातवीं महिला हैं वीणा देवी, जो मुंगेर की रहने वाली हैं। आइये जानते हैं इन महिलाओं की कहानी।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस: जानें किन महिलाओं को पीएम मोदी ने सौंपा अपना ट्विटर अकाउंट
स्नेहा मोहनदास फूडबैंक नाम से अभियान चलाती हैं जो बेघरों को खाना देने का काम करता है। उन्होंने अपनी कहानी साझा करते हुए लिखा, 'आपने सोचने के लिए खाना जरूरी है के बारे में सुना होगा। अब समय है कि इसपर कार्य किया जाए और गरीबों को एक बेहतर भविष्य दिया जाए। मुझे अपनी मां से प्रेरणा मिली जिन्होंने बेघरों को खाना खिलाने की आदत डाली। मैंने फूडबैंक इंडिया नाम के अभियान की शुरुआत की। भूख मिटाने की दिशा में मैंने स्वयंसेवियों के साथ काम किया जिनमें से ज्यादातर विदेश में रहते हैं। हमने 20 से ज्यादा सभाएं की और अपने काम के जरिए कई लोगों को प्रभावित किया। हमने साथ में मिलकर खाना बनाने, कुकिंग मैराथन, स्तनपान जागरुकता जैसी गतिविधियों की शुरुआत की। मुझे तब सशक्त महसूस होता है जब मैं वह करती हूं जिसका मुझे शौक है। मैं अपने देश के नागरिकों खासकर महिलाओं को आगे आने और मेरे साथ हाथ मिलाने के लिए प्रेरित करना चाहती हूं। मैं सभी से आग्रह करती हूं कि कम से कम एक जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराएं और एक भूख मुक्त ग्रह में योगदान दें।'
मालविका अय्यर ने अपनी कहानी बताते हुए कहा, '13 साल की उम्र में एक बम धमाके में मैंने दोनों हाथ गंवा दिए और पैर भी बुरी तरह से जख्मी हो गए थे। इसके बावजूद मैंने काम किया और अपनी पीएचडी की पढ़ाई की। किसी चीज को छोड़ देना विकल्प नहीं होता है। अपनी सीमाओं को भूल जाइए और विश्वास और आशा के साथ दुनिया में कदम रखते रहिए। मेरा मानना है कि शिक्षा परिवर्तन के लिए अपरिहार्य है। हमें भेदभावपूर्ण रवैये को लेकर युवाओं के दिमाग को संवेदनशील बनाना होगा। हमें विकलांग लोगों को कमजोर या दूसरे पर निर्भर दिखाने की बजाए उन्हें रॉल मॉडल के तौर पर दिखाना चाहिए। मनोवृत्ति विकलांगता को नष्ट करने की आधी लड़ाई है। माननीय प्रधानमंत्री ने महिला दिवस पर मुझे मेरे विचारों को प्रसारित करने के लिए चुना है। इससे मुझे विश्वास हो गया है कि विकलांगता के मामले में भारत पुराने अंधविश्वासों को खत्म करने के लिए सही रास्ते पर चल रहा है।'
जम्मू कश्मीर की रहने वाली आरिफा ने अपनी कहानी बताते हुए उन्होंने कहा कि मैंने हमेशा कश्मीर के पारंपरिक शिल्प को पुनर्जीवित करने का सपना देखा क्योंकि यह स्थानीय महिलाओं को सशक्त बनाने का एक साधन है। मैंने महिला कारीगरों की स्थिति देखी और इसलिए मैंने नमदा शिल्प को पुनर्जीवित करने का काम शुरू किया। मैं कश्मीर से आरिफा हूं और यह मेरी कहानी है। उन्होंने बताया, 'जब परंपरा और आधुनिकता का मिलन होता है तब चमत्कार होते हैं। मैंने अपने काम में इसका अनुभव किया है। इसे आधुनिक बाजार की मांग के अनुरूप बनाया गया है। मेरी पहली व्यावसायिक गतिविधि नई दिल्ली में हस्तनिर्मित वस्तुओं की प्रदर्शनी में भाग लेना था। इस प्रदर्शनी से अच्छे ग्राहक और एक टर्नओवर मिला।'
कल्पना रमेश पानी संरक्षण और वर्षा जल संचयन का काम करती हैं। अपनी कहानी बताते हुए उन्होंने कहा, 'छोटी कोशिशें बहुत बड़ा असर डाल सकते हैं। पानी एक मूल्यवान चीज है जो हमें विरासत के तौर पर मिली है। हमारी आने वाली पीढ़ियों को इससे वंचित न होने दें। जिम्मेदारी से पानी का उपयोग, वर्षा जल का संचयन करें, झीलों को बचाएं, उपयोग किए गए पानी को रिसाइकल करें और जागरूकता पैदा करें। मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि मैं चिड़ियों को वापस किसी झील में ला सकती हूं या प्रधानमंत्री के अकाउंट से ट्वीट कर सकती हूं। दृढ़ संकल्प के साथ असंभव को प्राप्त किया जा सकता है। हम जल संसाधनों के प्रबंधन पर सामूहिक कार्रवाई के साथ समुदायों में बदलाव ला सकते हैं। आइये हम परेशानी को खत्म करने वाले बनें।'