{"_id":"6aa8a4f0a6cac041240547da","slug":"india-space-economy-200-use-cases-identified-sectors-set-to-change-2026-09-15","type":"story","status":"publish","title_hn":"भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था: 200 से अधिक उपयोगी मामलों की हुई पहचान, किन क्षेत्रों में आएगा बदलाव?","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था: 200 से अधिक उपयोगी मामलों की हुई पहचान, किन क्षेत्रों में आएगा बदलाव?
Tue, 15 Sep 2026 07:23 AM IST
निर्मल कांत
एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Tue, 15 Sep 2026 07:23 AM IST
विज्ञापन
र किफायती सेवाओं की वैश्विक मांग से देश भरेगा ऊंची उड़ान
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम अब केवल उपग्रह प्रक्षेपण और वैज्ञानिक सफलताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की आर्थिक तरक्की और रणनीतिक मजबूती का एक नया इंजन बन रहा है।
कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (सीआईआई) और ईवाई की एक साझा रिपोर्ट के अनुसार, 2033 तक देश की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था के वर्तमान के 0.81 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 4.22 लाख करोड़ रुपये तक होने का अनुमान है। इस विस्तार के कारण नीतिगत सुधार, बढ़ता निवेश, उभरता स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र और किफायती सेवाओं की मांग हैं।
रोमांचक मोड़ पर सफर...अगली वृद्धि से पैदा होंगे नए व्यावसायिक अवसर
रिपोर्ट में पृथ्वी अवलोकन, उपग्रह संचार, पोजिशनिंग और नेविगेशन (पीएनटी) जैसे क्षेत्रों में 200 से अधिक उपयोग के मामलों की पहचान की गई है। ये तकनीकें कृषि, रसद (लॉजिस्टिक्स), बुनियादी ढांचा, आपदा प्रबंधन, शहरी नियोजन, वित्तीय सेवाएं, मत्स्य पालन, जलवायु लचीलापन, दूरसंचार और रक्षा जैसे क्षेत्रों में आमूल-चूल परिवर्तन ला रही हैं। ईवाई इंडिया के एयरोस्पेस और डिफेंस सेक्टर के पार्टनर गौतम नंदा ने कहा, भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र की कहानी एक रोमांचक मोड़ पर है।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें: अलर्ट: भारत में बिना अनुमति भारी धातु वाली क्रीम बेच रहा पाकिस्ताान, जहरीले रसायन के इस्तेमाल से कैसे बचें?
सीआईई नेशनल कमेटी ऑन स्पेस के चेयरमैन, मल्लावरपु अप्पाराव ने कहा, अंतरिक्ष के क्षेत्र में अगली वृद्धि अब क्षमताओं को रोजमर्रा के प्रभाव में बदलने से आएगी, जिससे उत्पादकता बढ़ेगी और नए व्यावसायिक अवसर पैदा होंगे। इसमें अंतरिक्ष-ग्रेड इलेक्ट्रॉनिक्स, प्रणोदक प्रणालियों, सेंसर और परीक्षण सुविधाओं में घरेलू विनिर्माण को मजबूत करना शामिल है।
बेहतर तालमेल से मजबूत होगी स्थिति
अप्पाराव ने कहा, उद्योग, स्टार्टअप, अनुसंधान संस्थानों और सरकार के बीच बेहतर तालमेल से भारत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष बाजारों में अपनी स्थिति मजबूत कर सकता है। साथ ही उच्च, मूल्य वाले रोजगार के नए अवसर पैदा कर सकता है, जिससे देश को आगे बढ़ने में मदद मिलेगी।
विज्ञापन
कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (सीआईआई) और ईवाई की एक साझा रिपोर्ट के अनुसार, 2033 तक देश की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था के वर्तमान के 0.81 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 4.22 लाख करोड़ रुपये तक होने का अनुमान है। इस विस्तार के कारण नीतिगत सुधार, बढ़ता निवेश, उभरता स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र और किफायती सेवाओं की मांग हैं।
विज्ञापन
रोमांचक मोड़ पर सफर...अगली वृद्धि से पैदा होंगे नए व्यावसायिक अवसर
रिपोर्ट में पृथ्वी अवलोकन, उपग्रह संचार, पोजिशनिंग और नेविगेशन (पीएनटी) जैसे क्षेत्रों में 200 से अधिक उपयोग के मामलों की पहचान की गई है। ये तकनीकें कृषि, रसद (लॉजिस्टिक्स), बुनियादी ढांचा, आपदा प्रबंधन, शहरी नियोजन, वित्तीय सेवाएं, मत्स्य पालन, जलवायु लचीलापन, दूरसंचार और रक्षा जैसे क्षेत्रों में आमूल-चूल परिवर्तन ला रही हैं। ईवाई इंडिया के एयरोस्पेस और डिफेंस सेक्टर के पार्टनर गौतम नंदा ने कहा, भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र की कहानी एक रोमांचक मोड़ पर है।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें: अलर्ट: भारत में बिना अनुमति भारी धातु वाली क्रीम बेच रहा पाकिस्ताान, जहरीले रसायन के इस्तेमाल से कैसे बचें?
सीआईई नेशनल कमेटी ऑन स्पेस के चेयरमैन, मल्लावरपु अप्पाराव ने कहा, अंतरिक्ष के क्षेत्र में अगली वृद्धि अब क्षमताओं को रोजमर्रा के प्रभाव में बदलने से आएगी, जिससे उत्पादकता बढ़ेगी और नए व्यावसायिक अवसर पैदा होंगे। इसमें अंतरिक्ष-ग्रेड इलेक्ट्रॉनिक्स, प्रणोदक प्रणालियों, सेंसर और परीक्षण सुविधाओं में घरेलू विनिर्माण को मजबूत करना शामिल है।
बेहतर तालमेल से मजबूत होगी स्थिति
अप्पाराव ने कहा, उद्योग, स्टार्टअप, अनुसंधान संस्थानों और सरकार के बीच बेहतर तालमेल से भारत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष बाजारों में अपनी स्थिति मजबूत कर सकता है। साथ ही उच्च, मूल्य वाले रोजगार के नए अवसर पैदा कर सकता है, जिससे देश को आगे बढ़ने में मदद मिलेगी।