यूपी के चुनावी रण में कई सीटें ऐसी भी रहीं जहां उम्मीदवारों के साथ-साथ उनके परिजनों की साख भी दांव पर लगी। ये वो सीटें हैं जहां से बड़े नेताओं ने अपने बेटे-बेटियों को चुनावी रण में उतारा। ऐसे में विरासत की सियासत को संभालने का जिम्मा उनके कंधों पर आ गया।
यूपी के रण में दिल्ली से लगते नोएडा विधानसभा की सीट सुर्खियों में रही। यहां से केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह के बेटे पंकज सिंह चुनाव लड़े। पंकज के लिए केंद्रीय मंत्रियों ने गली-गली जाकर वोट मांगे।
विरासत की सियासतः चुनाव बेटे-बेटियों का, इम्तिहान पिताओं का
अलीगढ़ की अतरौली सीट भी हॉट सीट रही। यह कल्याण सिंह और उनके परिवार की पारंपरिक सीट मानी जाती रही है। यहां से भाजपा ने कल्याण सिंह के पौत्र संदीप सिंह को उम्मीदवार बनाया।
विरासत की सियासतः चुनाव बेटे-बेटियों का, इम्तिहान पिताओं का
वेस्ट यूपी की कैराना विधानसभा सीट पर भाजपा ने सांसद हुकुम सिंह की बेटी मृगांका सिंह को उम्मीदवार बनाया। उनके मुकाबले में सपा के नाहिद हसन चुनाव लड़े। रालोद ने यहां से अनिल चौहान को उम्मीदवार बनाया, जो रिश्ते में हुकुम सिंह के भतीजे लगते हैं।
विरासत की सियासतः चुनाव बेटे-बेटियों का, इम्तिहान पिताओं का
वेस्ट की ही रामपुर की स्वार सीट सपा सरकार के कद्दावर मंत्री आजम खान के बेटे अब्दुल्ला खान चुनाव लड़े।
विरासत की सियासतः चुनाव बेटे-बेटियों का, इम्तिहान पिताओं का
बसपा सरकार में वरिष्ठ मंत्री रहे और अब भाजपा का दामन थाम चुके स्वामी प्रसाद मौर्या भी अपने बेटे को पार्टी से टिकट दिलाने में सफल रहे। उनके बेटे उत्कर्ष मौर्या को पार्टी ने ऊंचाहार सीट से उम्मीदवार बनाया।