{"_id":"5be92ef5bdec2269827d5547","slug":"this-village-is-fining-women-rs-2000-for-wearing-nighties-before-sunset","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"इस गांव में पुरुषों को लुंगी पहनने की आजादी, लेकिन महिलाओं ने पहनी नाइटी तो लगेगा जुर्माना","category":{"title":"Humour","title_hn":"हंसी-ठट्ठा","slug":"humour"}}
इस गांव में पुरुषों को लुंगी पहनने की आजादी, लेकिन महिलाओं ने पहनी नाइटी तो लगेगा जुर्माना
Mon, 12 Nov 2018 01:12 PM IST
फीचर डेस्क, अमर उजाला
फीचर डेस्क, अमर उजाला
Updated Mon, 12 Nov 2018 01:12 PM IST
विज्ञापन
1 of 6
lungi
- फोटो : self
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
Link Copied
भारत में महिलाओं के कपड़े पहनने को लेकर हमेशा से विवाद रहा है। पुरुष तो कभी भी कोई भी कपड़ा पहनकर घूम सकते हैं, लेकिन समय-समय पर लोगों ने महिलाओं के कपड़ों पर जरूर तरह-तरह के सवाल उठाए हैं। कुछ ऐसा ही हुआ है आंध्र प्रदेश के गोदावरी जिले के तोकालापल्ली गांव में। इस गांव में दिन के समय महिलाओं के नाइटी पहनने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।
2 of 6
इस गांव के बुजुर्गों ने एक आदेश जारी किया है कि कोई भी महिला दिन के समय नाइटी न पहने। उनका कहना है कि नाइटी केवल रात के लिए होती है। इसलिए उन्हें उसी समय पहना जाना चाहिए।
3 of 6
गांव के 9 सदस्यों की एक समिति ने एक रणनीति बनाई है, जिसमें यह सुनिश्चित किया गया है कि गांव की 1800 महिलाओं में से कोई भी उनके आदेश का उल्लंघन न करे। अगर कोई महिला सुबह के सात बजे से शाम के सात बजे तक नाइटी पहने हुए दिखाई देती है तो उसे 2000 रुपये का जुर्माना देना होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
4 of 6
यही नहीं, अगर कोई आदेश का उल्लंघन करने वाली महिलाओं के बारे में जानकारी देता है तो उसे ईनाम के तौर पर 1000 रुपये मिलेंगे। कुछ गांववालों का कहना है कि बुजुर्गों ने उन्हें दोषी पाए जाने पर सामाजिक बहिष्कार करने की धमकी दी है। उन्होंने यह भी कहा है कि इसके बारे में सरकारी अधिकारियों को कुछ न बताया जाए।
विज्ञापन
5 of 6
गांव की सरपंच फंतासिया महालक्ष्मी ने कहा कि खुले में कपड़े धोना, नाइटी पहने सब्जी की दुकान पर जाना या बैठक में शामिल होना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि कुछ महिलाओं ने बुजुर्गों से इसपर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी। हालांकि उन्होंने किसी भी तरह का प्रतिबंध लगाने या फिर आदेश का उल्लंघन करना वालों के सामाजिक बहिष्कार की बात को नकार दिया।
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
Next Article
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।