अंडर-19 क्रिकेट वर्ल्ड कप जीतने वाली भारतीय टीम में हरियाणा हिसार के दिनेश बाना ने वर्ष 2011 के वर्ल्ड कप की यादें ताजा कर दीं। धोनी की तरह टीम को जीत दिलाने वाले विकेट कीपर बल्लेबाज दिनेश बाना ने भी अंतिम समय में पांच बॉल पर एक रन और दो छक्के मारकर टीम को जीत दिलाई। इंडिया टीम की जीत के बाद जहां एक ओर शनिवार रात को मैच खत्म होने के बाद पटाखे फोड़कर खुशियां मनाई गईं। मिठाई बांटी गई। वहीं रविवार को भी सेक्टर-14 में दिनेश बाना के घर बधाइयों का तांता लगा रहा। खुशियों का कोई ठिकाना नहीं था। परिजनों, पड़ोसियों और दिनेश की एकेडमी के दोस्तों ने गुलाल की होली खेली। ढोल पर परिजन झूमते नजर आए।
अंडर-19 वर्ल्ड कप: जीत में चमके हिसार के दिनेश बाना, परिजन और शहरवासियों में खुशी, जानिए संघर्ष की कहानी
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रविवार शाम तक परिजनों से नहीं हुई थी दिनेश की बात
दिनेश के पिता महाबीर सिंह ने बताया कि रविवार शाम तक उनकी बेटे से बातचीत नहीं हो पाई थी। हालांकि रात को मैच जीतने के बाद कोच रणवीर ने उसे वाट्सएप पर बधाई दे दी थी। उस पर दिनेश ने भी थैंक्यू कर रिप्लाई किया और खुशी जताई। दिनेश सेंट सोफिया स्पोर्ट्स एकेडमी में कोच रणवीर से कई सालों से प्रशिक्षण ले रहा है।
शुरू में प्लास्टिक का बैट थमाया, एक साल बाद लकड़ी के बैट से प्रैक्टिस शुरू की
दिनेश बाना के पिता महाबीर सिंह का कहना है कि जब बेटा चार पांच साल का था तो उस समय उसे प्लास्टिक का बैट थमाया गया। एक साल तक प्लास्टिक के बैट से खेलने के बाद उसे लकड़ी का हल्का बैट दिलवाया। फिर धीरे धीरे उसकी क्रिकेट में रुचि बढ़नी शुरू हो गई। आज दिनेश ने भारतीय टीम को मैच जीताने में अहम भूमिका निभाई है। इस मैच में सभी की निगाहें दिनेश बाना पर टिकी हुई थीं।
माता ने कपड़े धोने से कर दिया था मना, प्रैक्टिस की लगन इतनी कि खुद धोए
दिनेश की माता दर्शना देवी ने बताया कि करीब पांच साल पहले की बात है। एक दिन बेटा रात को आठ बजे एकेडमी से प्रैक्टिस कर घर आया और आते ही कपड़े धोने की बात कही और कहा कि मुझे सुबह खेलने के लिए सिरसा जाना है, लेकिन माता ने रात को कपड़े धोने से मना कर दिया। लेकिन दिनेश की क्रिकेट में इतनी रुचि थी कि उसने रात को खुद वॉशिंग मशीन में कपड़े धोए और सुखाए। माता दर्शना देवी का कहना है कि आज भी वह दिन याद आ रहा है। माता ने बताया कि बेटे और कोच की मेहनत ने देश का नाम रोशन कर दिया। माता दर्शना का कहना है कि मैं चाहूंगी कि बेटा दिनेश भी धोनी की तरह खेले।
मां ने शुरू में नहीं किया था बेटे को सपोर्ट, सोचती थी क्रिकेट में तो पैसा चलता है
शुरू में जब बेटे ने क्रिकेट खेलना शुरू किया तो मां दर्शना देवी उसे सपोर्ट नहीं करती थीं। वह सोचती थीं कि क्रिकेट में तो पैसा ही चलता है। बेटा यहां तक कैसे पहुंच पाएगा। वह हमेशा उसे पढ़ाई करने पर ही फोकस के लिए कहती थीं। वह कहती थीं बेटा पढ़ाई कर नौकरी लग जा, लेकिन दिनेश ने क्रिकेट में ही करिअर बनाने की ठान ली थी और उसके बाद उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
पहले मौका मिलता तो और ज्यादा रन बनाता
दिनेश बेहतर खेला। अंतिम समय में ही दिनेश को बैटिंग करने का मौका मिला था। पांच बॉल में दिनेश ने 13 रन बनाकर टीम को जीत दिलाई। यदि दिनेश को पहले बैटिंग करने का मौका मिला तो कई चौकों और छक्कों की बौछार कर देता। -रणवीर, दिनेश के कोच
काफी खुशी
आज काफी खुशी है कि इतनी छोटी से उम्र में बेटे ने इतिहास रच दिया। मुझे बेटे पर गर्व है। भविष्य में भी बेटा इसी तरह नाम रोशन करता रहेगा। -महाबीर सिंह, दिनेश के पिता।