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ग्राउंड रिपोर्ट : यहां जीव हत्या पाप, पांव तले नहीं आने देते चींटी, बचाने का तरीका जान रह जाएंगे हैरान
Sat, 27 Feb 2021 11:37 AM IST
निवेदिता वर्मा
यशपाल शर्मा, अमर उजाला, लीलस/भिवानी (हरियाणा)
यशपाल शर्मा, अमर उजाला, लीलस/भिवानी (हरियाणा)
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Sat, 27 Feb 2021 11:37 AM IST
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जीव हत्या को पाप मानते हैं गांव लीलस के लोग।
- फोटो : अमर उजाला
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हरियाणा के हिसार से लगभग 32 किलोमीटर दूर स्थित है भिवानी जिले का सिवानी कस्बा। यहां से दाहिने हाथ मुड़ने पर दो-तीन किलोमीटर दूरी पर लीलस गांव पड़ता है। इस गांव में रहने वाले बिश्नोई समुदाय का एक बेहद कड़ा नियम है। वे जीव हत्या को पाप मानते हैं, इसलिए पांव तले चींटी भी नहीं आने देते। चाहे घर हो या बाहर। गांव से बाहर सड़क के दाएं हाथ पर ढाई किले में साढ़े तीन सौ गायों की श्री श्याम गोशाला है। इसमें गो सेवा के लिए लोगों का आना-जाना लगा रहता है। गोशाला के आंगन में जमीन में पतीले दबाए गए हैं। सिर्फ इसका मुंह ही मिट्टी से बाहर था और चारों तरफ गोलधारे में ईंटें रखी हुई थीं। जमीन में बने बिल से चींटियां पतीले में जा तो रही थीं, लेकिन बाहर नहीं निकल रही थीं। इस बारे में श्री श्याम गोशाला सेवा समिति लीलस के प्रधान धर्म सिंह बिश्नोई व गांव के प्रधान राजा राम ने रोचक धारणा बताई। उन्होंने बताया कि बिश्नोई समाज में किसी भी जीव की हत्या को पाप माना गया है, फिर वह छोटा हो या बड़ा।
पतीले में इकट्ठी की जाती हैं चीटियां।
- फोटो : अमर उजाला
लीलस में बिश्नोई समाज चींटियों को भी पैरों के नीचे आकर मरने नहीं देता। गोशाला के पास से गुजर रही सड़क पहले कच्ची थी, कुछ महीने पहले ही पक्की हुई है। पहले चींटियां रेत में दब जाती थीं, लेकिन सड़क पक्की होने पर ऊपर आने से मरने लगीं। इसलिए गोशाला के आंगन में इनके लिए जमीन में पतीले दबा दिए गए।
लीलस की गोशाला
- फोटो : अमर उजाला
जैसे ही ये भरते हैं, लोग चींटियों को दूर खेतों में छोड़ आते हैं। वहां पानी व दलिया डाल दिया जाता है, जिससे वे वहीं घर बना लेती हैं। घरों के आंगन में चींटी के बिल के पास भी ऐसा ही किया है। गोशाला में कुछ समय पहले ही यह नेक काम शुरू किया गया।
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धर्म सिंह बिश्नोई।
- फोटो : अमर उजाला
चींटियों का बिल घर या संस्था में होना शुभ
धर्म सिंह बिश्नोई व राम सिंह ने बताया कि चींटियों के बिल का घर व संस्था में होना वे शुभ मानते हैं। किंवदंती है कि जैसे-जैसे चींटियों की संख्या बिल में बढ़ेगी, वैसे ही घर या संस्थान भी तरक्की करेगा। खेतों, गोशाला और घरों में चींटियों के बिलों के पास वे रोजाना दलिया डालते हैं और पानी रखा जाता है। जिससे चींटियां अपनी भूख व प्यास मिटा लेती हैं।
धर्म सिंह बिश्नोई व राम सिंह ने बताया कि चींटियों के बिल का घर व संस्था में होना वे शुभ मानते हैं। किंवदंती है कि जैसे-जैसे चींटियों की संख्या बिल में बढ़ेगी, वैसे ही घर या संस्थान भी तरक्की करेगा। खेतों, गोशाला और घरों में चींटियों के बिलों के पास वे रोजाना दलिया डालते हैं और पानी रखा जाता है। जिससे चींटियां अपनी भूख व प्यास मिटा लेती हैं।
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लीलस गांव में पानी की काफी किल्लत है।
- फोटो : अमर उजाला
गुरु जंभेश्वर के नियमों पर बढ़ रहे आगे
लक्खी राम, मक्खन राम और रघुवीर ने बताया कि बिश्नोई समुदाय अपने गुरु जंभेश्वर जी के नियमों का आज भी पालन कर रहा है। वे किसी जीव जंतु को अपनी आंखों के सामने मरने या मारने नहीं देते। जीव-जंतुओं की रक्षा को उन्होंने अपना धर्म माना है। किसी घर में अगर कोई समस्या है, ग्रह भारी हैं या फिर बिना किसी बीमारी के कोई अस्वस्थ रह रहा है तो धारणा है कि इन चींटियों को दलिया या दाना डालने से काफी लाभ मिलता है।
लक्खी राम, मक्खन राम और रघुवीर ने बताया कि बिश्नोई समुदाय अपने गुरु जंभेश्वर जी के नियमों का आज भी पालन कर रहा है। वे किसी जीव जंतु को अपनी आंखों के सामने मरने या मारने नहीं देते। जीव-जंतुओं की रक्षा को उन्होंने अपना धर्म माना है। किसी घर में अगर कोई समस्या है, ग्रह भारी हैं या फिर बिना किसी बीमारी के कोई अस्वस्थ रह रहा है तो धारणा है कि इन चींटियों को दलिया या दाना डालने से काफी लाभ मिलता है।