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लॉकडाउन का डर: प्रवासी मजदूरों ने सुनाई दर्द भरी दास्तां, बोले- 72 घंटे के सफर में खाए दो बर्गर, पानी पीकर पहुंचे घर

Tue, 27 Apr 2021 11:53 AM IST
vivek shukla राजन राय, गोरखपुर।
राजन राय, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Tue, 27 Apr 2021 11:53 AM IST
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Workers Migrating From sikandrabad And telangana Due To Corona Infection
प्रवासी मजदूर। - फोटो : अमर उजाला।
तेलंगाना से गोरखपुर तक के 72 घंटे के बस के सफर में सिर्फ दो बर्गर ही खाया। पूरे रास्ते पानी पीकर यह सोचते रहे कि किसी तरह अपने घर पहुंच जाएं। पास में पैसे ही नहीं बचे थे, जिससे भरपेट कुछ खाया जा सके। चार बार बस को बदलकर किसी तरह अपने घर पहुंचने की जद्दोजहद भरी यह कहानी बेहद कारुणिक है।
Workers Migrating From sikandrabad And telangana Due To Corona Infection
प्रवासी मजदूर। - फोटो : अमर उजाला।
प्रवासी मजदूरों ने जब यह दास्तां सुनाई तो उनकी आंखों में आंसू छलक आए। रुंधी हुई आवाजें उनकी तकलीफ और डर को बयां कर रहीं थीं। दरौली, बिहार के अखिलेश साहनी ने बताया कि जिस कंपनी में काम करते थे, उसके सुपरवाइजर ने पांच हजार देकर भेज दिया। भरोसा दिलाया कि दो दिन में बाकी का 20 हजार खाते में भेज देंगे। रेलवे स्टेशन पहुंचकर जब एटीएम से बैलेंस चेक किया तो उसने रकम नहीं भेजी थी। अब मुश्किल यह थी कि घर तक कैसे पहुंचे? भूख भी ऐसी कि चला न जाए। जिस बस में आए थे, उसी के एक यात्री ने कहा कि हम किराया दे देंगे। वह भोजन भी कराने ले गया। भला हो होटल वाले का। उसने जब मेरी परेशानी जानी तो खाना खिलाया और उसके बदले कोई पैसे भी नहीं लिए।
Workers Migrating From sikandrabad And telangana Due To Corona Infection
प्रवासी मजदूर। - फोटो : अमर उजाला।
भूख से तड़प उठे पर घर पहुंचना था
सिवान (बिहार) के परवेज आलम ने बताया कि लॉकडाउन लगने वाला है। फैक्टरी बंद हो गई है। अगर नहीं आते तो भूखे मर जाते। पांच हजार रुपये कंपनी से मिले थे और बचत के एक हजार रुपये लेकर 23 अप्रैल की शाम को सिकंदराबाद से बस से निकल पड़ा। साथ में पांच लोग और भी थे। चार बार बस बदला। दो बसों में कोरोना जांच रिपोर्ट मांगी गई। रिपोर्ट हमारे पास नहीं थी तो 400 व 500 रुपये देने पड़े। नहीं देता तो कंडक्टर उतार देता, क्योंकि आने वालों की संख्या बहुत थी। हमें किसी तरह घर आना था। रास्ते में बस एक जगह रुकी तो जोड़-बटोकर, दो बर्गर खरीद कर खाया। साथ में आए लोगों का भी यही हाल था। किसी के पास एक भी रुपया नहीं बचा है। सफर में ढाबों पर जब भी बस रुकी तो बस पानी पिया और रास्ते भर भूख से बिलबिलाते रहे।
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प्रवासी मजदूर। - फोटो : अमर उजाला।
रास्ते में लूट मची है, 1900 रुपये में मिला टिकट
दरौली बिहार के अखिलेश साहनी ने बताया कि रास्ते भर लूट मची है। रेलवे स्टेशन के पास बस स्टेशन के काउंटर पर 1100 रुपये का टिकट 1900 में मिला। बस कंडक्टर बोला कि देना है तो बोलो वरना दूसरे को बैठाऊं। कोरोना जांच रिपोर्ट के नाम पर अलग से रकम वसूल रहे हैं। जिस ढाबे पर बस रुकी वहां खाने के दाम भी दोगुना। भगवान का शुक्र है, सलामत आ गए। बस इससे ज्यादा क्या बताऊं। हैदराबाद, सिकंदराबाद, तेलंगाना से बहुत सारे लोग बस से ही आए हैं। ट्रेन में कंफर्म टिकट नहीं मिल रहा है। एजेंट दो-दो हजार रुपये अतिरिक्त मांग रहे हैं।
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Workers Migrating From sikandrabad And telangana Due To Corona Infection
प्रवासी मजदूर। - फोटो : अमर उजाला।
बसों की कमी ने बढ़ाई प्रवासियों की परेशानी
पंचायत चुनाव में परिवहन निगम की बसें लगाई गई हैं। इससे दिल्ली सहित दूसरे प्रदेशों से आने वाले प्रवासियों को बसों की कमी के कारण परेशानी से जूझना पड़ रहा है। किसी तरह वह गोरखपुर तो पहुंच जा रहे हैं लेकिन यहां से उन्हें आसपास के दूसरे जिलों में जाने के लिए दिक्कत हो रही है।
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