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जब ट्रेन में नहीं था एसी कोच तब भी कूल-कूल होता था सफर, जानिए क्या था खास इंतजाम

Sun, 31 Jan 2021 09:01 PM IST
vivek shukla राजन राय, गोरखपुर।
राजन राय, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sun, 31 Jan 2021 09:01 PM IST
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when AC coach not on the train that time also journey was cool
पूर्वात्तर रेलवे स्टेशन। (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

जब ट्रेनों में वातानुकूलित (एसी) कोच नहीं थे, तब भी यात्री कूल-कूल सफर करते थे। इसके लिए रेलवे का खास इंतजाम था। ट्रेन में बर्फ की सिल्लियां रखी जाती थी। यह सुविधा फर्स्ट क्लास कोच में ही थी। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें...


 

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फर्स्ट क्लास कोच। (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला।

यात्रियों को कूल-कूल यात्रा कराने के लिए उनके कूपे (बोगी) में बर्फ की सिल्लियां रखवाई जाती थी। यही नहीं, उनकी खिड़कियों पर खस (सुगंधित पौधा) की चटाई बांधी जाती थी और उसे समय-समय पर भिगाने की भी व्यवस्था की जाती थी। इससे ट्रेन के कूपे में ठंडी-ठंडी हवा तो आती ही रहती थी, यात्रियों को खस की भीनी-भीनी खुशबू भी मिलती रहती थी।
 

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कोच। (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला।

कूपे में रखे होते थे आइस चैंबर
कोच के कूपे में एक आइस चैंबर बनाया जाता था। जिसमें बर्फ की सिल्लियां डाली जाती थीं। वहां पास में एक पंखा इस तरह से लगाया जाता था कि बर्फ की ढंडी हवा पूरे कूपे में सरकुलेट होती रहे। चूंकि इन डिब्बों में अंग्रेज भी सफर करते थे, इसलिए उसकी ठंडक बनाए रखने के लिए रेल कंपनी को काफी मशक्कत करनी होती थी।
 

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गोरखपुर रेलवे स्टेशन। (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

रेलवे स्टेशन के पास होता था बर्फघर
अंग्रेजों ने ट्रंक रूट पर या महत्वपूर्ण नामिनेटेड रेलवे स्टेशनों के पास बर्फघर बना रखा था। वहां टावरनुमा बने बर्फघर में नीचे आइस प्लांट लगा होता था और उसी के उपर बड़ी सी टंकी बनी होती थी, जिससे पानी लेकर बर्फ की सिल्लियां बनाई जाती थीं।


 

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ट्रेन। (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

वहां बने बर्फ की सप्लाई ट्रेनों में तो होती ही थी, अंग्रेज अफसर के दफ्तरों में भी इसे भेजा जाता था ताकि वह भारत की गर्मी में भी आराम से दोपहरी काट सके।


 
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