अंतरराष्ट्रीय बाल अधिकार दिवस के अवसर पर शुक्रवार को संतकबीरनगर जिले के विभिन्न थानों पर एक घंटे के लिए छात्र और छात्राओं को एसओ बनाया गया। इस दौरान थाने पर आने-वाले प्रकरणों की सुनवाई एसओ बनाए गए छात्र-छात्राओं ने की। उनके अंदर के आत्मविश्वास और फरियाद सुनकर लिए गए निर्णय की सभी ने सराहना की। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें...
एक घंटे के लिए बदल दी गई यहां थानेदारी, तस्वीरों में देखें कैसे छात्र बनें पुलिस अधिकारी
धनघटा थाने की कमान शुक्रवार को एक घंटे के लिए धनघटा निवासी एवं 12वीं के छात्र दीपक को सौंपी गई। उसी समय बरांव गांव निवासी आयशा खातून थाने पर फरियाद लेकर पहुंचीं। उनका आरोप था कि पति उसकी पिटाई करता है। पत्नी के साथ थाने पर गए मोहम्मद दीन को बुलाकर दीपक ने मारने-पीटने का कारण पूछा। उसके बाद पति-पत्नी से कहा कि आपस में थोड़ा बहुत विवाद तो होता रहता है। इसका मतलब नहीं की मारपीट कर लें। उन्होंने कहा कि पति-पत्नी के बीच लड़ाई झगड़ा होने का असर बच्चों पर पड़ेगा। दोनों को समझा-बुझाकर घर भेज दिया।
जनता आदर्श इंटर कॉलेज अंजाव की 12वीं की छात्रा कविता चौरसिया एक घंटे के लिए महुली थाने की एसओ बनाई गईं। इस मौके पर थाने के मुंशी नंदलाल यादव ने अपराध रजिस्टर का निरीक्षण कराते हुए अभिलेख दर्ज कराने संबंध में जानकारी दी। थाने का माहौल बदला हुआ नजर आया।
एसओ प्रदीप कुमार सिंह ने बताया कि यूनिसेफ के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में छात्राओं में झिझक को खत्म करना है। उन्होंने कहा कि बच्चों के मन से पुलिस को लेकर शंका को खत्म करना है। पुलिस की कार्यशैली से परिचित कराने के लिए उन्हें थानेदारी की जिम्मेदारी से परिचित कराया गया। इससे पुलिस व आम जनमानस के बीच तालमेल बढ़ाने में मदद मिलेगी।
कक्षा 10वीं की छात्रा प्रियंवदा को कुछ समय के लिए धर्मसिंहवा थाने का एसओ बनाया गया। उसी दौरान धर्मसिंहवा गांव निवासी शिखा शिकायत लेकर पहुंचीं कि पड़ोसियों से कुछ विवाद हो रहा है। एसओ प्रियंवदा ने शिकायत को गंभीरता से लिया और पुलिसकर्मी को मौके पर जाकर विवाद रोकने एवं उत्पात कर रहे लोगों को पकड़कर थाने लाने का निर्देश दिया।