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संतान का चेहरा देखने से पहले ही पिता की उठ गई अर्थी, पत्नी बोली- कैसे करेंगे इसकी परवरिश
Fri, 22 Jan 2021 05:07 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, देवरिया।
अमर उजाला ब्यूरो, देवरिया।
Published by: vivek shukla
Updated Fri, 22 Jan 2021 05:07 PM IST
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घटनास्थल पर छानबीन करती पुलिस।(इनसेट में मृतकों की फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला।
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उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में बुधवार को हुए सड़क हादसे में दो लोगों की मौत के बाद उनके परिवार की खुशियां छीन गईं। बीएसएफ के जवान व उसके साथी की मौत से पूरा गांव स्तब्ध है। हादसे के बाद से ही परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया है। परिजनों का विलाप देखकर हर किसी की आंखें नम हो जा रही हैं।
मृतकों की फाइल फोटो।
- फोटो : अमर उजाला।
बता दें कि फुलवरिया गांव के दो युवकों की हादसे में हुई मौत से पूरे गांव में सन्नाटा है। मृतक बीएसएफ जवान गौरीशंकर की तैनाती जम्मू में थी। वह 13 नवंबर को छुट्टी पर मकान बनवाने घर आए थे। छुट्टी पूरी होने पर मुख्यालय से बार-बार बुलावा आ रहा था। सभी लोग यही कह रहे थे कि सेना मुख्यालय के बुलावे पर ऊपर वाले का बुलावा भारी पड़ा।
रोते-बिलखते परिजन।
- फोटो : अमर उजाला।
गौरीशंकर अपने तीन भाइयों में सबसे बड़े थे और परिवार के कमाऊ सदस्य थे। उनकी पत्नी मोनिका सिंह अपने एक साल के पुत्र के साथ कोलकाता में रहती हैं। मां गीता देवी और दोनों भाई हरिशंकर और प्रेमशंकर भी वहीं रहते हैं। घर पर दादी कुंती देवी रहती हैं।
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मृतक रत्नेश सिंह की फाइल फोटो।
- फोटो : अमर उजाला।
माता-पिता के इकलौते संतान थे रत्नेश
उधर, दूसरे मृतक रत्नेश सिंह अपने पिता मैनेजर सिंह और माता राम कुमरा देवी की एकमात्र संतान थे। उनकी डेढ़ वर्ष पूर्व शादी हुई थी। पत्नी अंचला देवी इस समय गर्भवती हैं। पति की मौत की खबर मिलने के बाद से ही अंचला बदहवास हो गई। बिलखते हुए बोली कि अपनी संतान का चेहरा देखने से पहले ही रत्नेश ने दुनिया छोड़ दिया। अब बच्चे की परवरिश कैसे होगी। वहीं पिता मैनेजर सिंह मदन मोहन मालवीय पीजी कॉलेज भाटपार रानी से चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी से वर्ष 2009 में सेवानिवृत्त हो गए थे।
उधर, दूसरे मृतक रत्नेश सिंह अपने पिता मैनेजर सिंह और माता राम कुमरा देवी की एकमात्र संतान थे। उनकी डेढ़ वर्ष पूर्व शादी हुई थी। पत्नी अंचला देवी इस समय गर्भवती हैं। पति की मौत की खबर मिलने के बाद से ही अंचला बदहवास हो गई। बिलखते हुए बोली कि अपनी संतान का चेहरा देखने से पहले ही रत्नेश ने दुनिया छोड़ दिया। अब बच्चे की परवरिश कैसे होगी। वहीं पिता मैनेजर सिंह मदन मोहन मालवीय पीजी कॉलेज भाटपार रानी से चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी से वर्ष 2009 में सेवानिवृत्त हो गए थे।
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हादसे के बाद घटनास्थल पर मौजूद पुलिस।
- फोटो : अमर उजाला।
सड़क पर तड़पते रहे बाइक सवार
हादसे के बाद बीएसएफ के जवान व उसका दोस्त सड़क पर तड़प रहे थे। लेकिन मदद के बजाए लोग तमाशबीन बने रहे। कुछ लोग तो घटना की तस्वीर व वीडियो बनाने में लगे रहे। अगर समय से अस्पताल पहुंचाया गया होता तो शायद दोनों की जान बच जाती।
हादसे के बाद बीएसएफ के जवान व उसका दोस्त सड़क पर तड़प रहे थे। लेकिन मदद के बजाए लोग तमाशबीन बने रहे। कुछ लोग तो घटना की तस्वीर व वीडियो बनाने में लगे रहे। अगर समय से अस्पताल पहुंचाया गया होता तो शायद दोनों की जान बच जाती।