देवरिया जिले के कपरवार पश्चिमपुरा टोला स्थित प्राचीन भवन में ठाकुर जी महाराज विराजमान हैं। करीब 300 साल पुराना मंदिर खंडहर में तब्दील हो गया है। इसके जीर्णोद्धार के लिए भगीरथ की दरकार है। ठाकुरद्वारा में आज भी दोनों वक्त गांव के लोग भोग लगाते हैं।
तस्वीरें: तीन सौ साल पहले यहां हुआ था मंदिर का निर्माण, अब खंडहर में विराजमान हैं ठाकुर जी महाराज
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लोगों का कहना है कि गांव के ही बुलाकी साहू बांग्लादेश समेत अन्य देशों से नदी के रास्ते गल्ले का व्यापार करते थे। बताया जाता है कि एक दिन में व्यापार में भारी मुनाफा होने पर उन्होंने ठाकुरद्वारा मंदिर का निर्माण कराया था।
ठाकुरद्वारा में स्थापित भगवान की मूर्तियां दुर्लभ पत्थरों की बताई जाती हैं। ठाकुर जी का भवन जर्जर हाल में है। बरसात में भवन का कुछ हिस्सा गिर भी गया है।
पूर्व में होली त्योहार पर ठाकुर जी की सुंदर झांकी निकाली जाती थी। दर्शनोें के लिए लोगों की भीड़ जुटती थी। हर दरवाजे पर श्रद्धालु पूजा-अर्चन के साथ अबीर-गुलाल चढ़ाते थे।
लोगों का कहना है कि होली के दिन ठाकुर जी की निकाली जाने वाली झांकी के कारण लोग मांस-मदिरा के सेवन से बचते थे। लेकिन त्योहार के विकृत रूप धारण कर लेने से पिछले कुछ वर्षों से शोभायात्रा पर विराम लग गया है।