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यूपी: छोटी-छोटी कोशिशों से नजीर बना ये गांव, तस्वीरें देखकर आप भी करेंगे तारीफ

Sat, 27 Feb 2021 04:29 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sat, 27 Feb 2021 04:29 PM IST
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special story of Jangle Dirghan Singh Village in Gorakhpur
जंगल दीर्घन सिंह गांव। - फोटो : अमर उजाला।

गोरखपुर जिले के पिपरौली ब्लाक के जंगल दीर्घन सिंह गांव के निवर्तमान प्रधान विवेक शाही ने छोटी-छोटी कोशिशों से अपनी पंचायत की आय बढ़ाकर न केवल उसे सशक्त बनाया, बल्कि प्रदेश की दूसरी पंचायतों के लिए नजीर पेश की है। शासन की तरफ से आय के मॉडल के तौर पर चुनी गई प्रदेश की चंद पंचायतों में जंगल दीर्घन सिंह गांव का भी नाम शामिल है।



 

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जंगल दीर्घन सिंह गांव। - फोटो : अमर उजाला।

लखनऊ स्थित दीन दयाल उपाध्याय राज्य ग्राम्य विकास संस्थान में 22, 23 और 24 फरवरी को आयोजित एक कार्यशाला में इस गांव के निवर्तमान प्रधान ने आय बढ़ाने के अपने प्रयासों को साझा किया। शासन अब पंचायत चुनाव के बाद प्रदेश भर के प्रधानों से इन सुझावों को साझा करेगा, ताकि वे भी इस मॉडल को अपनाकर अपनी पंचायतों की आय बढ़ा सकें।

 

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जंगल दीर्घन सिंह गांव। - फोटो : अमर उजाला।

सीसीटीवी कैमरों से होती है गांव की निगरानी
गांव के हर एंट्री प्वाइंट और महत्वपूर्ण जगहों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। कुल 12 कैमरे लगे हैं, जिनसे गांव की निगरानी होती है। इन कैमरों के लगने के बाद से गांव की सुरक्षा और मजबूत हुई है। गांव वाले भी काफी सुरक्षित महसूस करते हैं। वर्ष 2011 की जनगणना में गांव की आबादी 1045 थी, जो अब बढ़कर 1600 हो गई है।

 

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जंगल दीर्घन सिंह गांव। - फोटो : अमर उजाला।

छोटी पंचायत होने से कम मिलता था बजट, तभी महसूस हुई जरूरत
जंगल दीर्घन सिंह गांव के निवर्तमान युवा प्रधान विवेक शाही कहते हैं कि उनकी पंचायत छोटी है। इसलिए बजट कम मिलता था। इस कमी ने ही पंचायत की आय बढ़ाने के लिए प्रेरित किया, ताकि गांव का ज्यादा से ज्यादा विकास किया जा सके। विवेक बताते हैं कि गांव के लोगों की आय सीमित है। ज्यादातर लोगों का पूरा परिवार कृषि से होने वाली, आय पर निर्भर है। 2015 में प्रधान बनने के बाद उन्होंने सोचा कि छोटे-छोटे प्रयास शुरू किए जाएं और थोड़ा-थोड़ा धन एकत्रित किया जाए, ताकि लोगों पर भार भी न बढ़े और पंचायत की आय बढ़ती रही।

 

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जंगल दीर्घन सिंह गांव। - फोटो : अमर उजाला।

इन प्रयासों से बढ़ाई पंचायत की आय
जंगल दीर्घन सिंह के निवर्तमान प्रधान विवेक शाही बताते हैं कि प्रधान बनने के बाद से ही उन्होंने ग्राम पंचायत की आय अर्जित करने का उपाय शुरू कर दिया। पंचायत भवन पर फोटो कापी मशीन लगवाई। वहां लगे कंप्यूटर से आय प्रमाणपत्र, जाति प्रमाणपत्र जैसे अन्य दस्तावेज को बनवाने के लिए आवेदन किया जाता है। इसके बदले न्यूनतम रकम ली जाती है। इसी तरह पीने के शुद्ध पानी के लिए वाटर एटीएम लगाया गया है। बदले में लोगों को 10 रुपये में 20 लीटर शुद्ध पानी मिलता है। एक छोटा पोखरा है। उसके पट्टे से भी 10 हजार रुपये सालाना मिल जाते हैं। मांगलिक कार्यक्रमों के लिए बरात घर की बुकिंग से आय अर्जित की जाती है। हर बुकिंग के लिए एक हजार रुपये लिए जाते हैं। इससे उसकी सफाई और रंगरोगन का काम चलता रहता है। कुछ आय भी हो जाती है। विवेक का कहना है कि इन सभी माध्यमों से आने वाली आय को ग्राम पंचायत के खाते में जमा कर दिया जाता है। छह हजार रुपये से शुरू हुई, आय वर्तमान में करीब 70 से 80 हजार रुपये सालाना तक पहुंच गई है।

डीपीआरओ हिमांशु शेखर ठाकुर ने कहा कि कई पंचायतें अपने खुद के प्रयास से आय अर्जित कर रही हैं। इसी तरह का गांव जंगल दीर्घन सिंह भी है। इस गांव के आय माडल को लखनऊ में आयोजित कार्यशाला में भी प्रस्तुत किया गया, ताकि नए प्रधान भी इस मॉडल को अपनाकर अपने गांवों की आय बढ़ा सकें।
 

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