कुशीनगर जिले के पटहेरवा थाना क्षेत्र के गांव सेंदुरिया में पुरातत्व विभाग की तरफ से संरक्षित टीला है। इस टीले पर दुर्गा जी का प्राचीन मंदिर है। मंदिर के आसपास कई कुएं इसकी ऐतिहासिकता को प्रमाणित करते हैं। ऐसी मान्यता है कि यहां जो भी मन्नत मांगी जाती है, वह पूरी होती है।
कुशीनगर में इस मंदिर को पुरातत्व विभाग ने किया है संरक्षित, जानिए क्या है इसमें खास
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किंवदंती है कि सिंदूरीगढ़ के किला में राजा मदन सिंह रहा करते थे। इनके राज्य में मां दुर्गा के एक भक्त रहसू गुरू थे जिन्हें यह आशीर्वाद प्राप्त था कि इन्हें भोजन के लिए किसी से कुछ मांगना नहीं पड़ेगा।
रहसू गुरू कतरा (घास) काटकर फेंक देते थे, जिसे बाघ दंवरी (मड़ाई) करते थे। इससे कतरा से सुगंधित चावल निकलता था। इसकी जानकारी किसी ने राजा मदन सिंह को दी तो उन्होंने रहसू गुरू को अपने महल में बुलाया और उन पर झूठ फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि अगर वे देवी के सच्चे भक्त हैं तो साक्षात दिखाएं।
कहा जाता है कि रहसू गुरू ने राजा को हठ त्यागने का सुझाव दिया लेकिन राजा ने रहसू गुरू का उपहास करते हुए देवी दुर्गा का साक्षात दर्शन नहीं कराने पर मौत के घाट उतार देने का हुक्म दिया। इसके बाद रहसू गुरू ने मां भवानी का आह्वान किया। कुछ ही क्षण में रहसू गुरू का मस्तक फट गया और उसमें से देवी का कंगन युक्त हाथ दिखाई दिया। इस घटना के बाद वहां मौजूद सभी जीव-जंतु व महल आदि नष्ट हो गए।
इस मंदिर पूजा पाठ करने वाले गुलाब साधु, जर्मन साधु, रमाशंकर साधु व हरिहर साधु बताते हैं कि मंदिर में मां दुर्गा के अलावा राजा मदन सिंह व रहसू गुरू की मूर्ति स्थापित है। टीले पर कई प्राचीन व अति गहरे कुएं हैं। पुरातत्व विभाग की तरफ से संरक्षित यहां के टीले की खुदाई कराई जाए तो पुरातन इतिहास से जुड़े कई साक्ष्य मिल सकते हैं।