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हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे से कम नहीं था ये बदमाश, पुलिस ने बदला लेने के लिए पैर में मारी थी गोली
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Fri, 23 Oct 2020 09:47 AM IST
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विकास दुबे और मिथुन निषाद। (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला।
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आज हम आपको गोरखपुर के एक ऐसे बदमाश के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसने कानपुर के हिस्ट्रीशीटर बदमाश विकास दुबे की तरह पुलिस वालों को घेर लिया था। उस समय संयोग अच्छा था कि उस घटना में किसी पुलिस कर्मी की मौत नहीं हुई थी। आगे की स्लाइड्स में पढ़ें पुलिस कैसे लिया बदमाश से बदला...
बात 14 अक्तूबर 2018 की रात की है। हिस्ट्रीशीटर मिथुन पासवान के घर दावत हो रही थी और वह कई मामलों में वांछित था। उसकी तलाश में पुलिस टीम उसके घर पहुंच गई थी लेकिन इसकी भनक बदमाशों को पहले ही लग गई थी। फिर क्या दबिश देने गई पुलिस टीम पर बदमाशों ने हमला कर दिया।
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इस घटना में किसी पुलिस कर्मी की जान नहीं गई थी। (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला।
इस हमले में दो सिपाही समेत एक दारोगा घायल हुए थे। बदमाशों ने सिपाही वंश नारायण गौड़ को गोली भी मार दी थी। जबकि रॉड और लाठी-डंडों से दारोगा घनश्याम वर्मा और सिपाही शैलेंद्र सिंह की पिटाई कर दी थी। गंभीर हालत में घायल पुलिस कर्मियों को मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। मिथुन पासवान 13 संगीन मुकदमों में वांछित था। इस घटना से पहले साल 2017 में भी उसका सामना खोराबार पुलिस से हुआ था। उस समय भी वह इस मुठभेड़ से बच निकला था।
पुलिस टीम पर हमले के बाद पुलिस वालों का मनोबल गिर गया था। पुलिस बदमाशों से लोहा लेने में कतरा रही थी, इसी दौरान आईजी के पद पर जयनारायण सिंह ने चार्ज संभाला (वर्तमान में एडीजी कानपुर) था। जयनारायण सिंह ने आते ही सबसे पहला टारगेट मिथुन को ही बनाया और एक विशेष टीम गठित कर मिथुन की तलाश में लगा दी गई।
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वर्तमान एडीजी कानपुर जयनारायण सिंह और हिस्ट्रीशीटर मिथुन। (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला।
25 नवंबर 2018 की तड़के सुबह पुलिस और मिथुन उसके साथियों से मुठभेड़ हो गई। गुलरिहया इलाके के बनगाई जंगल के पास पुलिस मुठभेड़ में मिथुन और उसके साथी धीरू पासवान को पैर में गोली लग गई थी। कहा जाता है कि पुलिस ने उनके पैरों पर गोली मारकर पुलिस हमले का बदला लिया था। फिलहाल वह जेल में है।
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