गोरखपुर जिले से होकर बहने वाली रोहिन नदी का जलस्तर भी खतरे के निशान से 2.44 मीटर ऊपर पहुंच गई है। इससे मानीराम कुदरिहा बांध से रिसाव हो रहा है। जंगल कौड़िया के आसपास स्कूलों में बाढ़ का पानी भर गया है। बांधों के कटाने का खतरा है। इससे आसपास के ग्रामीण सहमे हैं। सिंचाई विभाग के अफसरों के साथ ही ग्रामीण भी बांधों की निगरानी कर रहे हैं। कई संपर्क मार्ग भी पानी से घिर गए हैं। इससे आवागमन बाधित है।
रोहिन नदी: 20 वर्ष पहले जैसी तबाही मचाने को बेताब है नदी, 179 गांव बाढ़ की जद में
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इस नदी के चपेट में कैंपियरगंज के साथ ही सदर तहसील क्षेत्र के गांव आते हैं। शहरी क्षेत्र में भी इसका असर दिखता है। जलस्तर में भीषण बढ़ोतरी से ही रोहिन नदी के बांधों से पानी का रिसाव हो रहा है। मानीराम कुदरिहा बांधे से सोमवार की सुबह ही रिसाव शुरू हो गया। इससे हड़कंप मच गया। पूरे मामले की सूचना सिंचाई विभाग के अफसरों को दी गई। अधीक्षण अभियंता दिनेश सिंह टीम के साथ मौके पर गए। मशक्कत के बाद रिसाव को बंद कराया।
राप्ती (बर्डघाट) 74.98 76.36 76.59
रोहिन (त्रिमुहानी घाट) 82.44 84.15 84.80
सरयू (अयोध्या) 92.73 93.14 93.23
कुआनो (मुखलिसपुर) 78.65 77.30 77.50
गोर्रा (पिंडरा) 77.50 71.40 71.45
प्रभावित गांवों में पहुंचाई जा रही सुविधाएं
सोमवार को 179 गांव बाढ़ की जद में आ गए। इससे 188180 की आबादी प्रभावित हुई है। 27640 हेक्टेयर क्षेत्रफल की फसल बर्बाद हुई है। प्रशासन की तरफ से सतत निगरानी की जा रही है। बाढ़ प्रभावित गांवों में राहत पैकेट का वितरण किया जा रहा है।
नेपाल की पहाड़ी पर हो रही बारिश का असर मैदानी इलाके में हो रहा है। इसके चलते नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। जिले में बहने वली सभी प्रमुख नदियां घाघरा, राप्ती, रोहिन, गोर्रा, कुआनों सभी खतरे के निशान से काफी ऊपर बह रही हैं। इसके चलते बाढ़ से प्रभावित गांवों की संख्या बढ़ती जा रही है।