उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में एक अजीबो-गरीब मामला सामने आया है। यहां रेलवे स्टेशन की पटरियों से चूहों ने अपना आशियाना बदल दिया है, सुनकर थोड़ी हैरानी जरूर हुई होगी लेकिन यह बात सच है। आगे की स्लाइड्स में पढ़ें पूरी खबर...
अजीबो-गरीब: चूहों ने रेलवे पटरियों से बदला अपना 'आशियाना', अब यहां कर रहे निवास
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दरअसल, लॉकडाउन में रेलवे स्टेशन से गायब चूहों की तादाद फिर बढ़ने लगी है। इस बार चूहों ने अपना ठिकाना भी बदल दिया है। पटरियों से ज्यादा चूहे अब दफ्तरों में बस गए हैं। 10 से 15 चूहे रोजाना मारे जा रहे हैं। इन्हें मारने के लिए रेल प्रशासन करीब सात लाख रुपये सालाना खर्च करता है।
लॉकडाउन में ट्रेनों का संचालन बंद होने से चूहों को जंक्शन और पटरियों पर खुराक नहीं मिली। ऐसे में अधिकतर चूहे मर गए, जो बच गए, उन्होंने अपना ठिकाना बदल दिया। इससे रेल प्रशासन ने राहत की सांस ली थी, लेकिन ट्रेनों का संचालन शुरू होने के साथ ही यह समस्या फिर खड़ी हो गई है।
चूहों ने इस बार पटरियों के बजाए दफ्तरों को अपना ठिकाना बना लिया है। ये सर्वाधिक नुकसान पार्सल और अमानती सामान घर में कर रहे हैं। रेलवे ने दो साल के लिए चूहों को मारने का ठेका दे रखा है। इसमें दवाइयां, मैन पावर और चूहों के बिल को बंद करने का काम होता है।
तीन शिफ्ट में काम करते हैं कर्मचारी
गोरखपुर जंक्शन पर चूहों को मारने का ठेका लेने वाले ठेकेदार आरपी मिश्रा ने बताया कि चूहों को मारने के लिए तीन शिफ्ट में एक-एक कर्मचारी की रोजाना ड्यूटी लगती है। पटरियों पर अभी चूहे कम हैं। इनका ठिकाना अब दफ्तर हो गया है। केमिकल के जरिए रोजाना 10 से 15 चूहे मारे जाते हैं।
रेलवे प्रशासन बढ़ा सकता है रकम
मुख्य स्वास्थ्य निरीक्षक ने बताया कि पेस्टीसाइड के काम का बजट बढ़ाने की योजना पर विचार चल रहा है। अब इसे 75 हजार रुपये महीने किया जा सकता है। ठेकेदार से दो साल का अनुबंध था, जो अक्तूबर में समाप्त हो रहा है।