गोरखपुर में मानसून की दस्तक के इंतजार में एक सप्ताह से ज्यादा का वक्त बीच चुका है। लेकिन, विशेषज्ञ बता रहे हैं कि कमजोर सिस्टम ने इसकी राह फिलहाल रोक रखी है। अब तीन से चार दिनों में (26-27 जून) मानसून के गोरखपुर पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।
Gorakhpur Monsoon: कमजोर सिस्टम ने रोकी राह, अभी गोरखपुर वासियों को और करना होगा बारिश का इंतजार
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सामान्य तौर पर बिहार और पूर्वी उत्तरप्रदेश में बंगाल की खाड़ी में बने सिस्टम की वजह से मानसून की बारिश होती है। लेकिन, इस बार बंगाल की खाड़ी में बना कम दबाव का क्षेत्र बिहार आते-आते कमजोर पड़ जा रहा है। पुरवा हवा का साथ नहीं मिलने से मानसून का सिस्टम पूर्वी उत्तरप्रदेश तक नहीं पहुंच पा रहा है। पुरवा हवा बंगाल से निकलने के बाद असम की ओर से मुड़ जा रही है। इस वजह से असम में अच्छी खासी बारिश हो रही है।
मौसम विशेषज्ञ कैलाश पांडेय ने बताया कि बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव का क्षेत्र 26-27 जून तक गोरखपुर में मानसूनी बारिश शुरू कर सकता है। हालांकि, इस बीच स्थानीय सिस्टम की वजह से गोरखपुर एवं आसपास के क्षेत्रों में बूंदाबांदी हो सकती है।
शहर में आते-जाते रहे बादल
बृहस्पतिवार को गोरखपुर में दिन भर बादलों की आवाजाही लगी रही। सहजनवां के कुछ इलाकों में बूंदाबांदी भी हुई। वहीं, शाम को मौसम बेहतर होने से बड़ी संख्या में लोगों ने रामगढ़ ताल का रुख किया।
गोरखपुर जनपद में बहने वाली नदियों के तटबंधों को बाढ़ से बचाव के लिए 31 परियोजनाओं का कार्य पूरा होने की समयसीमा 20 जून थी। लेकिन मानसून के जिले में दस्तक देने के बावजूद अब तक मात्र एक परियोजना पूरी हो सकी है। विभाग के जिम्मेदार कार्य पूरा होने में विलंब का कारण देरी से धन मिलने को बता रहे हैं। उनका कहना है कि इसी वजह से कार्य अभी अधूरा है।