पांच अगस्त बुधवार को अयोध्या की पावन धरती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भगवान श्रीराम के मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन के साथ ही देश व दुनिया को व्याधियों से मुक्ति के लिए रामार्चा पूजन भी करेंगे। काशी विद्वत परिषद के तीन आचार्य इस विशेष पूजा के लिए सोमवार को ही अयोध्या पहुंच गए। इनके निर्देशन में ही भूमि पूजन का पूरा अनुष्ठान संपन्न होना है।
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बाएं स्वामी जितेंद्रनन्द सरस्वती, दाएं प्रो. विनय प्रकाश पांडेय।
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अयोध्या में भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर का मार्ग प्रशस्त होने के बाद बुधवार को भूमि पूजन होगा। इस धार्मिक अनुष्ठान के लिए काशी विद्वत परिषद से जुड़े तीन विद्वान प्रोफेसर विनय कुमार पांडेय, प्रोफेसर रामचंद्र पांडेय व प्रोफेसर रामनरायन द्विवेदी को अयोध्या बुलाया गया है।
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- फोटो : social media
कुशीनगर जिले के पडरौना ब्लाक के जंगल विशुनपुरा निवासी और बीएचयू के ज्योषित विभागाध्यक्ष प्रो. विनय कुमार पांडेय ने बताया कि भूमि पूजन की शुरुआत गौरी गणेश की पूजा से होगी। स्वस्तिवाचन के बाद मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम को प्रसन्न करने के लिए विशेष तौर पर रामार्चा पूजा की जाएगी।
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इन्होंने बताया कि हिंदू धर्म की मान्यता के अनुसार, पृथ्वी पर जब अनाचार बढ़ता है तब देवता कुपित होते हैं और महामारी के रूप में विनाश लीला शुरू होती है। चूंकि अयोध्या में जन्मे भगवान श्रीराम कल्याणकारी देवता भगवान श्री विष्णु के अवतार हैं इसलिए रामार्चा पूजन के जरिए भगवान से आराधना की जाएगी कि धरती पर पिछले कई महीनों से फैली महामारी को रोकें। पृथ्वीवासी इससे डरे हुए हैं।
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भगवान श्रीराम की पेंटिंग बनाता कलाकार
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अयोध्या में जब भगवान श्रीराम का मंदिर बन रहा है। यह कार्य लोक कल्याणकारी हो और इसका शुभ फल सभी को मिले, इसके लिए जरूरी है कि धरती पर महामारी का अंत हो। प्रो. विनय का कहना है कि चूंकि भगवान राम के मंदिर के लिए होने वाले भूमि पूजन में सभी देवी-देवताओं का आवाहन किया जाएगा। भगवान के अत्यंत प्रिय संकट मोचन हनुमान जी वहां विराजमान हैं। इसलिए महामारी से मुक्ति के लिए इस पूजा का विशेष महत्व है।