गोरखपुर जिले के प्रसिद्ध गोरखनाथ मंदिर को शहर के बड़े इलाके से जोड़ने वाले गोरखनाथ पुल के पिलर देखभाल के अभाव में टूट-फूट का शिकार हो रहे हैं। पुल के कई पिलर्स से सीमेंट क्षरण के कारण पपड़ी बन कर गिर रही है और अंदर की सरिया भी दिखने लगी हैं। कुछ पिलर की सरिया भी जंग लगने के कारण परत परत कर निकल रही है।
अमर उजाला लाइव: जर्जर हो रहे गोरखनाथ पुल के पिलर, तस्वीरें देखकर उड़ जाएंगे होश
रंगरोगन और देखभाल के अभाव में सीमेंट में हुआ क्षरण, हवा के संपर्क में आने से सरियों में भी लगा जंग
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पुल को बने महज 36 वर्ष ही हुए हैं और इसके आधारभूत ढांचे यानी बीम और पिलर में टूट फूट साफ नजर आने लगी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पिलर और बीम की भी लगातार मरम्मत और देखभाल की जाती तो इसकी उम्र काफी बढ़ सकती थी।
उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम के उप परियोजना प्रबंधक कृष्णेंदु भट्टाचार्य से संपर्क करने का प्रयास किया गया लेकिन उनका सीयूजी नंबर लगातार स्विच ऑफ मिला। सहायक अभियंता स्तर के एक अधिकारी ने नाम न छापने का अनुरोध करते हुए कहा कि टीम भेज कर मुआयना कराया जाएगा। मुआयना रिपोर्ट के आधार पर मरम्मत कराई जाएगी।
औसतन 70 वर्ष होती है आरसीसी पुल की आयु
एक बड़ी इंजीनियरिंग कंपनी के कंस्ट्रक्शन स्ट्रेंथनिंग (निर्माण मजबूती) मामलों के जानकार बताते हैं कि री इन्फोर्स्ड कंक्रीट सीमेंट (आरसीसी) पुल की औसत आयु 70 वर्ष मानी जाती है। यदि निर्माण के बाद से उसका रंगरोगन, देखभाल और जरूरी मरम्मत की जाती रहे तो पुल सौ साल या उससे अधिक कार्यशील रहता है। स्थानीय लोगों के अनुसार गोरखनाथ पुल को बने हुए मात्र 36 वर्ष ही गुजरे हैं, लेकिन कभी भी इसकी मरम्मत या रंगरोगन होते नहीं देखा गया। स्थानीय नागरिक मनोज कुशवाहा कहते हैं कि हां, पुल की सड़क की मरम्मत होती रहती है, लेकिन आधारभूत ढांचे पर कोई काम नहीं किया गया है।
क्षरण या टूट फूट का आकलन कर हो सकती है मरम्मत
इंजीनियरिंग मामलों के जानकार बताते हैं कि किसी भी निर्माण में हुए क्षरण या टूट फूट की मरम्मत जांच के बाद की जा सकती है। यदि टूट फूट केवल सतही है जैसे सीमेंट उखड़ जाना और बाहर निकली सरिया में जंग लग जाना। ऐसे मामलों में साधारण मरम्मत कार्य जैसे प्लास्टर करने या सरिया बदलने का काम किया जाता है। यदि क्षति ज्यादा हुई है तो इसके लिए नॉन डिस्ट्रक्टिव टेस्ट (एनडीटी) किया जाता है। इस टेस्ट में एक्सरे जैसी मशीनों से निर्माण के अंदर हुई टूट फूट और क्षय की जांच की जाती है। अंदर हुई टूट फूट या क्षय की मरम्मत भी एडवांस इंजीनियरिंग सिस्टम से की जाती है।