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#LadengeCoronaSe: पेट के बल लेटकर सोएं, ठीक हो जाएगा ऑक्सीजन स्तर

Sat, 24 Apr 2021 12:21 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sat, 24 Apr 2021 12:21 PM IST
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oxygen level will be corrected after Sleep on your stomach
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock

डॉक्टरों की सलाह है कि ऑक्सीजन स्तर कम होने पर धैर्य न खोएं। मरीज को पेट के बल लिटाकर सुला दें तो उसके ऑक्सीजन का स्तर ठीक हो जाएगा। संक्रमण के शुरुआती दिनों में ही अगर मरीज ध्यान दें तो उनका बचाव हो सकता है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के चेस्ट विभागाध्यक्ष डॉ. अश्वनी मिश्र ने बताया कि कोरोना के कोई भी लक्षण होने पर तत्काल आइसोलेट हो जाएं। होम आइसोलेशन में दवाओं को तत्काल शुरू कर दें। रिपोर्ट का इंतजार कर वायरस को पनपने का मौका ही न दें। इसकी गाइडलाइन भी स्वास्थ्य विभाग ने जारी की है।



 

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कोरोना वायरस। - फोटो : अमर उजाला।

चेस्ट फिजीशियन डॉ. वीएन अग्रवाल ने बताया कि पहले सप्ताह में वायरस तेजी से शरीर में बढ़ता है। समय से संक्रमण के लक्षण सामने आने लगते हैं। इसे नजरअंदाज बिल्कुल न करें। सात से नौ दिनों पर सीटी स्कैन कराकर फेफड़े में शुरुआती दौर के संक्रमण का पता लगाएं। यदि सांस पहले ही फूलने लगे तो समय से पहले ही सीटी स्कैन जरूर करा लें।

 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

ऑक्सीजन स्तर 90 से नीचे हो तभी हों भर्ती
फिजीशियन डॉ. गौरव पांडेय ने बताया कि अगर ऑक्सीजन का स्तर 90 से 95 के बीच है तो सतर्क होने की जरूरत है। हालांकि, इतने पर भी घर पर ऑक्सीजन स्तर को मैनेज किया जा सकता है। ऐसा होने पर धैर्य खोने की जरूरत नहीं है। दवा के साथ-साथ मरीज को प्रोन वेंटिलेशन (पेट के बल लिटाकर) रखें। मरीज सीने के पास तकिया लगाकर लेटे हुए सांस लें और फिर छोड़ें। इससे ऑक्सीजन स्तर मेंटेन हो जाएगा। इस तकनीक का इस्तेमाल दिन में कई बार कर सकते हैं।

 

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डॉ. अश्वनी मिश्रा। - फोटो : अमर उजाला।

फेफड़ों में आ जाता है पानी
डॉ. अश्वनी मिश्रा ने बताया कि एक्यूट रेस्परेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम (एआरडीएस) के कारण फेफड़े के निचले हिस्से में पानी आ जाता है। पीठ के बल मरीज के लेटे रहने से फेफड़े के निचले हिस्से की एल्बुलाई में खून तो पहुंचता है, पर संक्रमण की वजह से ऑक्सीजन और कॉर्बन डाइऑक्साइड को निकालने की प्रक्रिया नहीं हो पाती है। मरीज को पेट के बल लिटाने से फेफड़े में संकुचन कम हो जाता है। प्रेशर हल्का हो जाता है और पूरे फेफड़े में रक्त का संचार अच्छे से होने लगता है। कॉर्बन डाइऑक्साइड के निकलने से ऑक्सीजनेशन की प्रक्रिया में सुधार आता है। इसका इस्तेमाल बीआरडी के मरीजों पर भी किया जा रहा है। इससे काफी हद तक फायदा मिला है।

 

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ऑक्सीजन - फोटो : पीटीआई

बेड न मिलने पर घर पर दें ऑक्सीजन सपोर्ट
डॉ. वीएन अग्रवाल ने बताया कि ऑक्सीजन 90 से कम होने पर अस्पताल में मरीज को भर्ती कराएं। बेड न मिलने पर ऑक्सीजन सिंलिडर लगाकर मरीज को ऑक्सीजन दें। इस बीच ऑक्सीमीटर से ऑक्सीजन का स्तर नापते रहें। ऑक्सीजन लेवल जब 90 के ऊपर स्थिर हो जाए तो सपोर्ट धीरे-धीरे कम करें।

 

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