आज देशभर में कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की पुण्यतिथि मनाई जा रही है। प्रेमचंद्र तिलस्मी और ऐय्यारी पुस्तकों को पढ़ने के बेहद ही शौकीन थे। इन किताबों को पढ़ने का चस्का उन्हें गोरखपुर के रावत पाठशाला में पढ़ने के दौरान लगा। इसी चस्के ने उन्हें कथा सम्राट बना डाला। आगे की स्लाइड्स में पढ़ें कथा सम्राट की गोरखपुर की कहानी...
मुंशी प्रेमचंद्र से जुड़ी ये बात नहीं जानते होंगे आप, इन किताबों ने इन्हें बनाया था 'कथा सम्राट'
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प्रेमचंद गोरखपुर शहर में पहली बार 1892 में आए जब उनके पिता अजायब लाल का तबादला गोरखपुर हुआ। वह लगभग चार वर्ष तक यहां रहे और रावत पाठशाला और फिर मिशन स्कूल में आठवीं जमात तक पढ़ाई की। यहीं पर उन्हें तिलस्मी और ऐय्यारी की किताबें पढ़ने का जबरदस्त चस्का लगा, जिसने कहानीकार प्रेमचंद को अंकुरित किया।
रेती पर के बुकसेलर बुद्धिलाल की दुकान थी उनकी पसंदीदा ठौर
तिलस्मी और ऐय्यारी पुस्तकों को पढ़ने के लिए मुंशी प्रेमचंद अक्सर रेती पर स्थित एक बुक सेलर बुद्धि लाल की दुकान पर घंटों बिताया करते थे। यह उनकी पसंदीदा ठौर (अड्डा) थी। अपनी एक पुस्तक में मुंशी प्रेमचंद्र ने जिक्र करते हुए लिखा है कि 'रेती पर एक बुकसेलर बुद्धिलाल नाम का रहता था। मैं उसकी दुकान पर जा बैठता था और उसके स्टाक के उपन्यास ले-लेकर पढ़ता था। मगर दुकान पर सारे दिन तो बैठ न सकता था, इसलिए मैं उसकी दुकान से अंग्रेजी पुस्तकों की कुंजियां और नोट्स लेकर अपने स्कूल के लड़कों के हाथ बेचा करता था और उसके मुआवजे में दुकान से उपन्यास घर लाकर पढ़ता था। दो-तीन वर्षों में मैंने सैकड़ों उपन्यास पढ़ डाले होंगे।'
अपने मामा पर लिखी थी प्रेमचंद ने अपनी पहली पुस्तक
प्रेमचंद ने पहली रचना अपने मामा पर लिखी थी, जो व्यंग्य-रचना थी। यह उनके मामू के प्रेम प्रसंग और उसे लेकर घटी सच्ची घटना पर थी। हालांकि अब वह उपलब्ध नहीं है। उनका पहला उपलब्ध लेखन उनका उर्दू उपन्यास 'असरारे मआबिद' है। प्रेमचंद का दूसरा उपन्यास 'हमखुर्मा व हमसवाब' जिसका हिंदी रूपांतरण 'प्रेमा' नाम से 1907 में प्रकाशित हुआ था।
प्रेमचंद पार्क के अंदर आज भी है उनका सरकारी आवास
मुंशी प्रेमचंद गोरखपुर में गवर्नमेंट नॉर्मल स्कूल में सहायक अध्यापक होकर 18 अगस्त 1916 को आए। इसके पहले वह बस्ती में तैनात थे। वह 18 अगस्त की शाम को बस्ती से गोरखपुर पहुंचे थे। उसी रात उनके बड़े बेटे श्रीपत राय का जन्म हुआ तब उन्हें सरकारी क्वार्टर नहीं मिल पाया था।