मतगणना स्थल को संक्रमण मुक्त रखने के लिए एहतियातन जारी एक शर्त खुद जिला प्रशासन के गले की फांस बन सकती है। प्रशासन ने मतगणना स्थल पर आने के लिए सभी प्रत्याशियों व उनके एजेंटों को कोरोना जांच की रिपोर्ट लाना अनिवार्य कर दिया है। शर्त यह भी है कि रिपोर्ट मतगणना वाले दिन यानी दो मई से 72 घंटे पूर्व की ही हो।
पंचायत चुनाव: कहीं मुसीबत न पैदा कर दे बचाव का ये फरमान, चरमरा सकती है जांच की व्यवस्था
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ऐसे में 29 अप्रैल से एक मई तक जिले में 50 हजार से अधिक प्रत्याशी व उनके एजेंट जांच कराने के लिए स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर जिला अस्पताल तक पर लाइन लगाएंगे। स्वास्थ्य केंद्रों पर तो जांच की व्यवस्था भी सिर्फ शाम चार बजे तक ही है । ऐसे में सेंटरों पर अफरातफरी का माहौल बन सकता है।
जिले में ग्राम पंचायत सदस्य पद के 6893, प्रधान के 8822, क्षेत्र पंचायत सदस्य पद के 8175 और जिला पंचायत सदस्य पद के 869 उम्मीदवार हैं। यानी कुल 24759 प्रत्याशी। सभी के अगर एक-एक एजेंट भी हुए तो यह संख्या 50 हजार पहुंच जाएगी। पंचायत चुनाव को लेकर लड़ाई जोरदार होती है, इसलिए ऐसा भी नहीं कि कुछ प्रत्याशी मतगणना स्थल पर नहीं जाना चाहेंगे। संकट यह है कि प्रशासन, एहतियात न बरते तो मतगणना स्थल पर तैनात हजारों की संख्या में कर्मचारी के साथ ही खुद प्रत्याशी और उनके एजेंटों के संक्रमित होने का खतरा है।
वहीं, सभी प्रत्याशी व उनके एजेंटों की सिर्फ तीन दिन में ही जांच जरूरी किए जाने से स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर जिला अस्पताल तक अफरातफरी मचने का भी अंदेशा है। कई संक्रमित लोगों को भी जांच कराने के लिए मुश्किलें झेलनी पड़ सकती है। साथ ही इस बात का भी अंदेशा है कि तीन दिनों में 50 हजार लोगों के जांच कराने से अचानक जिले में संक्रमितों की संख्या में भी इजाफा हो सकता है । ऐसे में स्वास्थ्य सेवाओं पर तो जोर पड़ेगा ही गांवों में भी भय का माहौल बन सकता है।