विकास दुबे गैंग ने पुलिस टीम पर हमला करने में जो एके 47 इस्तेमाल की थी, वह कहीं दो फरवरी 2019 को इटवा थाने से गायब हुई एके 47 तो नहीं। कानपुर में आठ पुलिसकर्मियों की शहादत के बाद चल रही जांच में अपराधियों की ओर से एके 47 का इस्तेमाल किया जाने की बात सामने आने पर क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। आगे की स्लाइड्स में पढ़ें पूरी कहानी...
Vikas Dubey Encounter: जिस एके 47 से विकास दुबे ने ली थी आठ पुलिसकर्मियों की जान, इस थाने से हुई थी गायब!
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कानपुर के बिकरू गांव में 2 जुलाई की रात दबिश देने गई पुलिस पर विकास दुबे और उसके गुर्गों ने खतरनाक हथियारों से हमला कर आठ पुलिसकर्मियों की जान ले ली थी। घटना के बाद जांच में जुटी फोरेंसिक टीम को मौके से एके 47 असॉल्ट राइफल के खोखे मिले थे। खोखे मिलने पर यह माना गया कि जिन हथियारों से पुलिस टीम पर गोलियां बरसाई गईं, उनमें एके 47 भी थी।
यह जानकारी होने के बाद आशंका जताई जा रही है कि सिद्धार्थनगर जिले के इटवा थाने से गायब हुई एके 47 तो विकास दुबे के यहां नहीं पहुंच गई। यदि यह इटवा थाने से चोरी हुई एके 47 नहीं भी है तो अर्धसैनिक बल और पुलिस महकमे में विशेष ट्रेंड पुलिसकर्मियों को ही दी जानी वाली यह असॉल्ट राइफल विकास दुबे तक कैसे पहुंची, लोगों में यह जानने की जिज्ञासा है।
क्या है मामला
इटवा थाने में पुलिस के आला अधिकारियों ने गनर के लिए एके 47 असॉल्ट राइफल जारी की थी। फरवरी 2019 में थाना इंचार्ज अनिल प्रसाद पांडेय थे और मालाखाने का चार्ज हेड वीरेंद्र यादव और राम प्रसाद सिंह थे। एक फरवरी की शाम ड्यूटी हेड वीरेंद्र यादव की थी लेकिन वह ड्यूटी पर नहीं थे। उनकी जगह राम प्रसाद सिंह ड्यूटी पर थे।
पाली खत्म होने पर शाम को गनर ने मालखाने में एके 47 जमा करवाई थी। दो फरवरी की सुबह मालखाने में हथियारों की मिलान की गई तो एके 47 गायब थी। इस मामले में थानाध्यक्ष, दोनों हेड चार्ज और दो सिपाहियों को निलंबित कर केस दर्ज किया गया था। मामला अब न्यायालय में विचाराधीन है और सभी पुलिसकर्मी बहाल होकर अलग-अलग जगह नौकरी कर रहे हैं।