गोरखपुर में इलाज के लिए बिहार या यूपी के दूसरे शहरों से आने वाले मरीजों को बरगला कर कुछ निजी एंबुलेंस चालक और बिचौलिए अच्छे दामों पर कुछ निजी अस्पतालों को ‘बेच’ रहे हैं। इन अस्पतालों में इलाज के नाम पर मनमानी वसूली की जाती है। इसी लूट से अस्पताल प्रबंधन बिचौलियों और एंबुलेंस चालकों को मोटा कमीशन दे रहे हैं। एक गंभीर मरीज को अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस चालक को 45-50 हजार रुपये तक का मोटा कमीशन मिलने की बात सामने आई है। सामान्य मरीजों को भर्ती कराने पर 25-30 हजार रुपये तक मिल जाते हैं।
एक्सक्लूसिव: यूपी के इस जिले में बिकते हैं 'मरीज', खरीदार लगाते हैं बोली
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कमीशनबाजी के इस धंधे से आईएमए के पदाधिकारी भी चिंतित हैं। अब आईएमए ही कमीशनबाजी के आरोपों से चिकित्सा के पेशे को बचाना चाहता है। इस गठजोड़ की अमर उजाला ने पड़ताल की तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। पता चला कि कुछ निजी अस्पताल बिचौलिए व एंबुलेंस चालकों के सहारे ही चल रहे हैं। ये मरीज व उनके परिजनों को फंसाकर लाते हैं, फिर मोटा कमीशन लेते हैं।
पड़ताल के मुताबिक जिले में एंबुलेंस चालकों और कुछ निजी अस्पताल संचालकों व डॉक्टरों के बीच गठजोड़ बेहद मजबूत है। इनके नेटवर्क को न तो स्वास्थ्य विभाग तोड़ पा रहा और न इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) गोरखपुर की इकाई। इनको चिकित्सा के पवित्र पेशे में गंदगी की जानकारी है, फिर भी वे कुछ नहीं कर पा रहे हैं। हाल के दिनों में बीआरडी मेडिकल कॉलेज के सामने से एक मरीज को बरगला कर निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसकी सूचना पर एडीएम फाइनेंस राजेश कुमार सिंह व ड्रग इंस्पेक्टर जय सिंह की टीम ने कार्रवाई की थी। निजी अस्पताल में भर्ती मरीज को पहले बीआरडी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया था।
सरकारी अस्पतालों के पास मजबूत नेटवर्क
निजी अस्पतालों व दलालों का नेटवर्क सबसे ज्यादा जिला अस्पताल, महिला अस्पताल और बीआरडी मेडिकल कॉलेज के आसपास फैला है। जैसे ही मरीज गेट पर पहुंचता है, वैसे ही निजी एंबुलेंस चालक सक्रिय हो जाते हैं और मरीज को निजी अस्पताल में भर्ती कराने के प्रयास में जुट जाते हैं। परेशान मरीज या उसके परिजनों को बरगला कर निजी अस्पताल ले जाते हैं, फिर शुरू होता है पैसा जमा कराने का सिलसिला।
यहां से आने वाले मरीजों को बनाते हैं निशाना
इस नेटवर्क से जुड़े बिचौलिए देवरिया, कुशीनगर, महाराजगंज, बिहार, बस्ती, संतकबीरनगर, सिद्धार्थनगर और नेपाल से आने वाले मरीजों को निशाना बनाते हैं।
गोरखनाथ क्षेत्र में बिचौलियों की सक्रियता
सिद्धार्थनगर, महराजगंज और नेपाल से आने वाले मरीजों को गोरखनाथ क्षेत्र के आसपास के इलाकों के निजी अस्पतालों में ले जाया जाता है। इस क्षेत्र में निजी एंबुलेंस चालकों के साथ ही कुछ ऑटो व टेंपो चालकों का मजबूत नेटवर्क बना हुआ है। ऑटो, टैंपो में मरीज व उनके परिजन जैसे ही बैठते हैं, वैसे ही निजी अस्पताल के डॉक्टरों का गुणगान शुरू हो जाता है। यह गुणगान निजी अस्पताल में मरीज को पहुंचाने के बाद ही समाप्त होता है। यही नहीं बिचौलिए निजी अस्पतालों के निदेशक बनकर बात करते हैं। कहते हैं कि जाकर डॉक्टर साहब से मिल लीजिए। बता दीजिए डायरेक्टर साहब ने भेजा है।