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विशेषज्ञों की सलाह: कोरोना से बच्चों को बचा सकती है इन्फ्लूएंजा की वैक्सीन, छह माह से पांच वर्ष तक मासूमों के लिए है कारगर
Wed, 23 Jun 2021 12:31 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Wed, 23 Jun 2021 12:31 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : पीटीआई
विशेषज्ञों ने पांच साल तक के मासूम बच्चों को कोरोना के संक्रमण से बचाने के लिहाज से इन्फ्लूएंजा की वैक्सीन को कारगर माना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह वैक्सीन एंटी फ्लू है। ऐसे में अगर बच्चे संक्रमित होते हैं तो भी उन्हें ज्यादा दिक्कत नहीं होगी। साथ ही उन्हें वेंटिलेटर की जरूरत नहीं पड़ सकती है। पांच साल से कम उम्र के बच्चे को यह वैक्सीन लगवाई जा सकती है।
प्रतीकात्मक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला
खास बात यह रही कि इन बच्चों को वेंटिलेटर की भी जरूरत नहीं पड़ी। इसी शोध को आधार मानते हुए इंडियन एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने पांच साल से कम उम्र के बच्चों को इन्फ्लूएंजा वैक्सीन लगाने की सलाह दी है। वैक्सीन लगने के बाद अगर बच्चे संक्रमण की चपेट में आते हैं तो भी वह गंभीर अवस्था में नहीं पहुंचेंगे। क्योंकि यह वैक्सीन फ्लू की है। कोरोना वायरस भी एक तरह का फ्लू है। ऐसे में यह असरदार है।
प्रतीकात्मक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला।
निमोनिया व कफ में वैक्सीन करती है काम
डॉ. भूपेंद्र ने बताया कि इन्फ्लूएंजा वैक्सीन ठंड, कफ व निमोनिया जैसे संक्रमण को कम करती है। फ्लू और कोरोना के लक्षण एक जैसे हैं। इसमें अंतर केवल यही है कि कोरोना का असर ज्यादा तेजी से होता है और यह फेफड़ों को जल्दी नुकसान पहुंचाता है। जबकि, सामान्य फ्लू का असर धीरे-धीरे होता है।
डॉ. भूपेंद्र ने बताया कि इन्फ्लूएंजा वैक्सीन ठंड, कफ व निमोनिया जैसे संक्रमण को कम करती है। फ्लू और कोरोना के लक्षण एक जैसे हैं। इसमें अंतर केवल यही है कि कोरोना का असर ज्यादा तेजी से होता है और यह फेफड़ों को जल्दी नुकसान पहुंचाता है। जबकि, सामान्य फ्लू का असर धीरे-धीरे होता है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : amar ujala
ऐसे में पहले भी बच्चों को यह वैक्सीन लगवाने की सलाह बाल रोग विशेषज्ञ देते आए हैं। बताया कि यह वैक्सीन छह माह के बाद और पांच साल से कम के बच्चों को ही लगाने की सलाह दी गई है।
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डॉ. अमरेश सिंह
- फोटो : अमर उजाला।
बच्चों के अंदर भी बनेगी एंटीबॉडी
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबॉयोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ अमरेश सिंह ने बताया कि स्तनपान कराने वाली मां अगर संक्रमित हुई है और वह ठीक हो गई है तो उनके अंदर भी एंटीबॉडी बन जाती है। इस दौरान अगर वह बच्चों को दूध पिलाती है तो बच्चे के शरीर में भी एंटीबॉडी बन जाएगी। दूध के जरिये मासूमों के अंदर प्रतिरोधक्षक क्षमता का विकास तेजी से होता है। इसलिए ऐसी महिलाएं बच्चों को स्तनपान कराती रहें।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबॉयोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ अमरेश सिंह ने बताया कि स्तनपान कराने वाली मां अगर संक्रमित हुई है और वह ठीक हो गई है तो उनके अंदर भी एंटीबॉडी बन जाती है। इस दौरान अगर वह बच्चों को दूध पिलाती है तो बच्चे के शरीर में भी एंटीबॉडी बन जाएगी। दूध के जरिये मासूमों के अंदर प्रतिरोधक्षक क्षमता का विकास तेजी से होता है। इसलिए ऐसी महिलाएं बच्चों को स्तनपान कराती रहें।