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इस देश में फंसे हैं गोरखपुर के ये लोग, जहां कोरोना से मरने वालों की संख्या है ज्यादा
Tue, 14 Apr 2020 06:48 PM IST
vivek shukla
राजन राय, गोरखपुर।
राजन राय, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Tue, 14 Apr 2020 06:48 PM IST
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Gorakhpur news
- फोटो : अमर उजाला।
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कोरोना वायरस से विदेशों में हालात ज्यादा खराब होते जा रहे हैं। खासकर, अमेरिका में इस महामारी की भयावहता से लोग दहशत में हैं। वहां कुछ लोग अपने शहर के भी हैं, जो नौकरी करने गए थे और अब घरों में कैद हैं। उनका कहना है कि रात जब सोने जाते हैं तो मन में कई तरह की आशंकाएं होती हैं।
Gorakhpur news
- फोटो : अमर उजाला।
यहां हर कोई है डरा-सहमा
कैरी नार्थ कैलिफोर्निया से साफ्टवेयर इंजीनियर संजय मिश्र बताते हैं- जिस तरह से कोरोना ने महामारी का रूप लिया है, हर कोई डरा-सहमा है। मैं जहां हूं, यहां तो अभी गनीमत है, लेकिन जिंदगी थम सी गई है। एक महीने हो गए, लॉकडाउन है। स्कूल, कॉलेज सहित सभी सार्वजनिक स्थल बंद हैं। बस एक सहूलियत है, यहां सामान खरीदने की छूट है।
घर से ही काम हो रहा है। बहुत सारे जरूरी सामान नहीं मिल पा रहे हैं। अब देखिए, डेढ़ महीने हो गए थे, बाल नहीं कटा था। हेयर सैलून बंद हैं। मैंने खुद ही अपने बाल काटे हैं। मेरे कई मित्र हैं जो अलग-अलग शहरों में हैं। घर जाने की इच्छा तो है लेकिन यह भी डर है कि जब फ्लाइट शुरू होगी तो यात्रा सुरक्षित रहेगी कि नहीं।
भारत पहुंचकर भी घर नहीं जा सकेंगे, 14 दिन तो क्वारंटीन होना पड़ेगा। बस यही सोचकर हम लोग यहां कोरोना से लड़ने के लिए हौसले को मजबूत किए हुए हैं।
कैरी नार्थ कैलिफोर्निया से साफ्टवेयर इंजीनियर संजय मिश्र बताते हैं- जिस तरह से कोरोना ने महामारी का रूप लिया है, हर कोई डरा-सहमा है। मैं जहां हूं, यहां तो अभी गनीमत है, लेकिन जिंदगी थम सी गई है। एक महीने हो गए, लॉकडाउन है। स्कूल, कॉलेज सहित सभी सार्वजनिक स्थल बंद हैं। बस एक सहूलियत है, यहां सामान खरीदने की छूट है।
घर से ही काम हो रहा है। बहुत सारे जरूरी सामान नहीं मिल पा रहे हैं। अब देखिए, डेढ़ महीने हो गए थे, बाल नहीं कटा था। हेयर सैलून बंद हैं। मैंने खुद ही अपने बाल काटे हैं। मेरे कई मित्र हैं जो अलग-अलग शहरों में हैं। घर जाने की इच्छा तो है लेकिन यह भी डर है कि जब फ्लाइट शुरू होगी तो यात्रा सुरक्षित रहेगी कि नहीं।
भारत पहुंचकर भी घर नहीं जा सकेंगे, 14 दिन तो क्वारंटीन होना पड़ेगा। बस यही सोचकर हम लोग यहां कोरोना से लड़ने के लिए हौसले को मजबूत किए हुए हैं।
पति और बच्चों के साथ प्रतिभा द्विवेदी।
- फोटो : अमर उजाला।
कोरोना का नाम सुनते ही कांप जाता है द्विवेदी परिवार
न्यूजर्सी मार्गेनविले से प्रतिभा द्विवेदी बताती हैं- एक महीने से ज्यादा वक्त हो गया है, घर से नहीं निकली। सामान भी ऑनलाइन ऑर्डर कर मंगाती हूं। यहां बुजुर्ग के लिए ब्रेकरी की दुकान आरक्षित कर दिए गए हैं। वे ही सामान ले सकते हैं। अब डर तो बहुत लग रहा है। आज ही सुबह पड़ोस में एक भारतीय महिला की मौत हो गई।
जबसे यह खबर सुनी हूं, बहुत डरी हुई हूं। रोजाना सैकड़ों लोग यहां मर रहे हैं। पति सत्यप्रकाश धर द्विवेदी, आईटी सेक्टर में नौकरी करते हैं। उन्होंने भी एक महीने से ऑफिस जाना बंद कर दिया है। बेटी सोनम और बेटा सोहम की ऑनलाइन क्लास चल रही है।
उसमें बच्चों को मदद करती हूं। जब मन घबराता है तो वीडियो कॉल से ससुराल और मायका बात कर लेती हूं। आठ अप्रैल को घर आने के लिए फ्लाइट बुक कराई थी, लेकिन कैंसिल हो गई। मैं तो ईश्वर से यही प्रार्थना कर रही हूं कि जल्द यह महामारी खत्म हो और मैं शाहपुर स्थित अपने घर जाऊं।
न्यूजर्सी मार्गेनविले से प्रतिभा द्विवेदी बताती हैं- एक महीने से ज्यादा वक्त हो गया है, घर से नहीं निकली। सामान भी ऑनलाइन ऑर्डर कर मंगाती हूं। यहां बुजुर्ग के लिए ब्रेकरी की दुकान आरक्षित कर दिए गए हैं। वे ही सामान ले सकते हैं। अब डर तो बहुत लग रहा है। आज ही सुबह पड़ोस में एक भारतीय महिला की मौत हो गई।
जबसे यह खबर सुनी हूं, बहुत डरी हुई हूं। रोजाना सैकड़ों लोग यहां मर रहे हैं। पति सत्यप्रकाश धर द्विवेदी, आईटी सेक्टर में नौकरी करते हैं। उन्होंने भी एक महीने से ऑफिस जाना बंद कर दिया है। बेटी सोनम और बेटा सोहम की ऑनलाइन क्लास चल रही है।
उसमें बच्चों को मदद करती हूं। जब मन घबराता है तो वीडियो कॉल से ससुराल और मायका बात कर लेती हूं। आठ अप्रैल को घर आने के लिए फ्लाइट बुक कराई थी, लेकिन कैंसिल हो गई। मैं तो ईश्वर से यही प्रार्थना कर रही हूं कि जल्द यह महामारी खत्म हो और मैं शाहपुर स्थित अपने घर जाऊं।
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Gorakhpur news
- फोटो : अमर उजाला।
एक महीने हो गए लोगों की शक्ल देखे
अमेरिका कैलिफोर्निया से शाश्वत बताते हैं- सच कहूं तो एक महीने हो गए हैं, लोगों की शक्ल तक नहीं देखा। घर में ही कैद होकर रह गए हैं। डर का माहौल है। मार्केट तो खुलते हैं लेकिन डर ऐसा है कि कौन जाए। ऑर्डर कर घर पर ही जरूरत के सामान मंगा लेता हूं।
एक दोस्त है, उससे ही अपनी भावनाएं साझा कर लेता हूं। पिछले साल गोलघर स्थित आवास पर गया था। इस बार भी इच्छा थी, पर कोरोना ने प्लान चौपट कर दिया। पापा संगम श्रीवास्तव से रोजाना बात हो जाती है। मां से भी वीडियो कॉल पर बात कर लेता हूं।
अमेरिका कैलिफोर्निया से शाश्वत बताते हैं- सच कहूं तो एक महीने हो गए हैं, लोगों की शक्ल तक नहीं देखा। घर में ही कैद होकर रह गए हैं। डर का माहौल है। मार्केट तो खुलते हैं लेकिन डर ऐसा है कि कौन जाए। ऑर्डर कर घर पर ही जरूरत के सामान मंगा लेता हूं।
एक दोस्त है, उससे ही अपनी भावनाएं साझा कर लेता हूं। पिछले साल गोलघर स्थित आवास पर गया था। इस बार भी इच्छा थी, पर कोरोना ने प्लान चौपट कर दिया। पापा संगम श्रीवास्तव से रोजाना बात हो जाती है। मां से भी वीडियो कॉल पर बात कर लेता हूं।
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रामलगन तिवारी।
- फोटो : अमर उजाला।
मां के अंतिम संस्कार व ब्रह्मभोज में भी नहीं जा सका
सउदी अरब से रामलगन तिवारी कहते हैं- अपनी वेदना कैसे बताऊं। एक अप्रैल को मेरा घर जाना तय था। छुट्टी भी सेंशन हो चुकी थी। बहुत खुश था कि घर के लोगों के साथ वक्त बिताने का अवसर मिलेगा। इसी बीच अचानक बड़े भाई का संदेश आया कि मां नहीं रहीं। मैं सुनकर स्तब्ध रह गया।
दो अप्रैल को उनका ब्रह्मभोज था। इसी बीच सारी इंटरनेशनल फ्लाइटें कैंसिल हो गईं। मैं, मां के अंतिम संस्कार और ब्रह्मभोज में भी शामिल नहीं हो सका। कोरोना के चलते यहां भी बाहर जाने पर पाबंदी है। ऑफिस की गाड़ी आती है, उसी से सभी लोग काम पर जाते हैं। यहां तो डर ही है, अपने देश में कोरोना तेजी से फैल रहा है, इसकी चिंता भी खाए जा रही है।
सउदी अरब से रामलगन तिवारी कहते हैं- अपनी वेदना कैसे बताऊं। एक अप्रैल को मेरा घर जाना तय था। छुट्टी भी सेंशन हो चुकी थी। बहुत खुश था कि घर के लोगों के साथ वक्त बिताने का अवसर मिलेगा। इसी बीच अचानक बड़े भाई का संदेश आया कि मां नहीं रहीं। मैं सुनकर स्तब्ध रह गया।
दो अप्रैल को उनका ब्रह्मभोज था। इसी बीच सारी इंटरनेशनल फ्लाइटें कैंसिल हो गईं। मैं, मां के अंतिम संस्कार और ब्रह्मभोज में भी शामिल नहीं हो सका। कोरोना के चलते यहां भी बाहर जाने पर पाबंदी है। ऑफिस की गाड़ी आती है, उसी से सभी लोग काम पर जाते हैं। यहां तो डर ही है, अपने देश में कोरोना तेजी से फैल रहा है, इसकी चिंता भी खाए जा रही है।