उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले के पल्टादेवी तहसील क्षेत्र में स्थित शक्तिपीठ मां पल्टादेवी मंदिर का इतिहास द्वापर युग में महाभारत से जुड़ा हुआ है। यहां पर श्रद्धालुओं का भाग्य माता के दर्शन मात्र से संवर जाता है। सच्चे मन से की गई प्रार्थना का मनवांछित फल माता अपने भक्तों को देती हैं।
इस मंदिर में 'पांडवों' की पूरी हुई थी मन्नत, यहां माता के दर्शन मात्र से संवर जाता है श्रद्धालुओं का भाग्य
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मंदिर के महंत घनश्याम गिरि जी महराज ने बताया कि द्वापर युग में जब पांडव जुए में अपना सबकुछ (राज पाट) हार गये थे और जुए में ये शर्त रखी गयी थी की हारने पर पांडव को 12 वर्षों का वनवास और एक वर्ष का अज्ञातवास बिताना पडे़गा।
साथ ही यह भी शर्त रखी गई थी कि एक वर्ष के इन अज्ञातवास में उनकी पहचान हो जायेगी तो उन्हें पुन: 12 वर्ष का वनवास और एक वर्ष का अज्ञातवास बिताना पडे़गा। इसी शर्त के साथ पाडंव अपनी पत्नी द्रौपदी सहित वनवास के लिए निकल पड़े।
मंदिर के महंत ने बताया कि ऐसा किदवंतियों के अनुसार उस दौरान पल्टादेवी के स्थान पर पांडव आए। उस समय यह स्थान भयानक जंगल था। जहां पर मां का स्थान है वहां पर युधीष्ठिर का पगड़ी रूपी मुकुट गिर गया था। उस वक्त राजाओं का मुकुट गिर जाना किसी बड़ी घटना का संकेत था।
सभी भाईयों में सहदेव ज्योतिषी थे और वे अपने ज्योतिष ज्ञान से बताए कि यहां देवी का साया है। पांडवों ने यहां पर रात्रि में विश्राम किया तो स्वपन मे मां ने युधिष्ठिर को अज्ञातवास बिताने का दिशा निर्देश दिया और सुबह युधिष्ठिर ने यहां पर मां पल्टा देवी का पूजा पाठ किया। यह मनौती मांगी की यदि मेरा राज्य मुझे पलटकर मिल जाता है तो मै यहां मंदिर की स्थापना करूंगा।
उसके बाद पांडवों को अपना राजपाट मिल गया। तत्पश्चात युधिष्ठिर ने मां पल्टादेवी व भगवान शिव जी की मंदिर की स्थापना की। मां पल्टादेवी बिगडे़ भाग्य को पलटने वाली देवी कही जाती हैं। इसी वजह से इनका नाम मां पल्टादेवी पड़ा और उनके नाम से ही इस जगह को पल्टा देवी कहा जाने लगा।
पगड़ी रूपी मुकुट गिरने की वजह से इस क्षेत्र को मुकुटा कहा जाता था जो बाद मे 'मेटुका' के नाम से प्रसिद्ध हो गया।
श्रद्धालु कैसे पहुचें यहां
गोंडा गोरखपुर वाया बढनी रूट पर चिल्हिया रेलवे स्टेशन से सात किलोमीटर उत्तर दिशा में चिल्हिया थाने से टेकनार होते हुए माता के मंदिर में पहुंचा जा सकता है। जिला मुख्यालय से लगभग 23 किलोमीटर सनई शोहरतगढ मार्ग से चिल्हिया से पल्टादेवी पहुंच सकते हैं।
बर्डपुर से 8 किलोमीटर पश्चिम मे बर्डपुर पल्टा देवी मार्ग वाया मंझरिया मुसहरी या वाया गौरा अलिदापुर होते हुए भी यहां पर पहुंच सकते हैं। शोहरतगढ से 9 किलोमीटर पूरब सड़क मार्ग से डोइ चौराहा, दत्तपुर होते हुए यहां पहुच जा सकता है।