गोरखपुर शहर आज किसी पहचान का मोहताज नहीं है। लोग इस शहर को देश ही नहीं विदेशों में भी जानने लगे हैं। आज हम आपको इसके बारे में एक खास कहानी बताने जा रहे हैं। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें...
गोरखपुर 'रामगढ़ ताल' की यह कहानी नहीं जानते होंगे आप, जानिए कैसे पड़ा इसका नाम
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गोरखपुर का प्राचीन नाम कभी रामग्राम भी था। गोरखपुर के इसी पुरातन नाम पर रामगढ़ ताल का नाम पड़ा है। जनश्रुतियों एवम् बौद्ध ग्रंथों से पता चलता है कि यह प्राचीन समय छठी शताब्दी में नागवंशी कोलिय गणराज्य की राजधानी थी, जिस वंश की गौतम बुद्ध की माता एवम् उनकी पत्नी थी इसलिए प्राचीन काल में गोरखपुर का प्राचीन नाम रामग्राम भी था।
करीब 1800 एकड़ में फैला हुआ है रामगढ़ ताल
गोरखपुर शहर के अंदर स्थित एक विशाल तालाब (ताल) है। यह 723 हेक्टेयर (लगभग 1800 एकड़) क्षेत्र में फैला हुआ है। इसका परिमाप लगभग 18 किमी है। इस ताल का केवल गोरखपुर के स्तर पर ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर ऐतिहासिक महत्व है।
राप्ती नदी की दिशा बदली तो उसके अवशेष से बना रामगढ़ ताल
ईसा पूर्व छठी शताब्दी में गोरखपुर का नाम रामग्राम था। यहां कोलीय गणराज्य स्थापित था। उन दिनों राप्ती नदी आज के रामगढ़ ताल से ही होकर गुजरती थी। बाद में राप्ती नदी की दिशा बदली तो उसके अवशेष से रामगढ़ ताल अस्तित्व में आ गया। रामग्राम से ही ताल को नाम रामगढ़ पड़ा।
रामगढ़ ताल में यह भी है एक जनश्रुति
एक और जनश्रुति यह भी है कि प्राचीन काल में ताल के स्थान पर एक विशाल नगर था, जो किसी ऋषि के श्राप में फंस गया। नगर ध्वस्त हो गया और वहां ताल बन गया। शुरुआती दौर में यह तालाब छह मील लंबा और तीन मील चौड़ा था तब इसका दायरा 18 वर्ग किलोमीटर था। अतिक्रमण के चलते अब यह सात वर्ग किलोमीटर में सिमट कर रह गया है।