उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के टॉप 10 बदमाशों की सूची में शामिल माफिया विनोद उपाध्याय को पुलिस ने लखनऊ से उठा लिया है। खबर है कि गोरखपुर पुलिस ने गोमती नगर इलाके से विनोद को दबोचा। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। बताया जा रहा है कि शाहपुर इलाके में एक ठेकेदार के घर पर फायरिंग करने के मामले में वह वांछित था।
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vinod upadhyay
- फोटो : Social media
जानकारी के मुताबिक, एक समय में अपराध के साथ ही राजनीति में भी विनोद उपाध्याय की धमक थी। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि आपराधिक इतिहास रहने के बावजूद उसने वर्ष 2001 में शाहपुर थाने से रिपोर्ट लगवाकर लाइसेंसी असलहा भी हासिल कर लिया था।
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विनोद उपाध्याय।(file)
- फोटो : अमर उजाला।
विनोद, माफिया सत्यव्रत राय का भी करीबी रह चुका है, लेकिन जमीन और रुपयों के लेनदेन को लेकर दोनों में विवाद हो गया था। इसी बीच विनोद के करीबी गंगेश पहाड़ी और दीपक सिंह की हत्या हो गई। इस हत्याकांड में सत्यव्रत और सुजीत चौरसिया समेत कई लोगों को आरोपित बनाया गया था। इसके बाद सत्यव्रत और सुजीत, विनोद को भी मारने के लिए ढूंढने लगे। जबकि विनोद अपने साथियों की हत्या का बदला लेने के लिए सुजीत को ढूंढने लगा। उस समय भी पुलिस ने विनोद को दबोचा था।
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vinod upadhyay
- फोटो : अमर उजाला।
पीडब्लूडी कांड से सुर्खियों में आया था विनोद
साल 2007 में पीडब्ल्यूडी दफ्तर के सामने गैंगवार की घटना से विनोद उपाध्याय सुर्खियों में आया था। तब विनोद उपाध्याय गैंग पर ताबड़तोड़ फायरिंग की गई थी। इसमें रिपुंजय राय और सत्येंद्र की मौत हो गई थी। हमले का आरोप लालबहादुर यादव गैंग पर लगा था। इस मामले में अजीत शाही, संजय यादव, इंद्रकेश पांडेय, संजीव सिंह समेत छह लोग जेल गए थे।
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला
हालांकि इस मामले में लालबहादुर यादव के खिलाफ मुकदमा तक दर्ज नहीं हुआ था। इसके बाद से दोनों गुटों में दुश्मनी और बढ़ गई थी। बाद में लालबहादुर यादव की हत्या कर दी गई थी, जिसमें विनोद उपाध्याय को पुलिस ने गिरफ्तार भी किया था।