उत्तर प्रदेश के गोरखपुर का रामगढ़ ताल आज किसी परिचय का मोहताज नहीं हैं। सीएम योगी ड्रीम प्रोजेक्ट में यह सबसे ऊपर आता है। इसे विश्व स्तरीय पर्यटन केंद्र के तौर पर विकसित किया जा रहा है। रामगढ़ताल में अब वॉटर स्पोर्टस को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे लोग रोइंग गेम के बारे में जान सके। आज हम आपको इसके इतिहास के बारे में बताने जा रहे हैं। रामगढ़ ताल को अब विदेशों में भी लोग जानने लगे हैं।
यहां दिन बनेगा सुहाना: बेहद रोचक है इस पिकनिक स्पॉट की कहानी, नजारा देखने के लिए लगती है हजारों की भीड़
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गोरखपुर का प्राचीन नाम कभी रामग्राम भी था। गोरखपुर के इसी पुरातन नाम पर रामगढ़ ताल का नाम पड़ा है। जनश्रुतियों एवम् बौद्ध ग्रंथों से पता चलता है कि यह प्राचीन समय छठी शताब्दी में नागवंशी कोलिय गणराज्य की राजधानी थी, जिस वंश की गौतम बुद्ध की माता एवम् उनकी पत्नी थी इसलिए प्राचीन काल में गोरखपुर का प्राचीन नाम रामग्राम भी था।
गोरखपुर शहर के अंदर स्थित एक विशाल तालाब (ताल) है। यह 723 हेक्टेयर (लगभग 1800 एकड़) क्षेत्र में फैला हुआ है। इसका परिमाप लगभग 18 किमी है। इस ताल का केवल गोरखपुर के स्तर पर ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर ऐतिहासिक महत्व है।
राप्ती नदी की दिशा बदली तो उसके अवशेष से बना रामगढ़ ताल
ईसा पूर्व छठी शताब्दी में गोरखपुर का नाम रामग्राम था। यहां कोलीय गणराज्य स्थापित था। उन दिनों राप्ती नदी आज के रामगढ़ ताल से ही होकर गुजरती थी। बाद में राप्ती नदी की दिशा बदली तो उसके अवशेष से रामगढ़ ताल अस्तित्व में आ गया। रामग्राम से ही ताल को नाम रामगढ़ पड़ा।
रामगढ़ ताल में यह भी है एक जनश्रुति
एक और जनश्रुति यह भी है कि प्राचीन काल में ताल के स्थान पर एक विशाल नगर था, जो किसी ऋषि के श्राप में फंस गया। नगर ध्वस्त हो गया और वहां ताल बन गया। शुरुआती दौर में यह तालाब छह मील लंबा और तीन मील चौड़ा था तब इसका दायरा 18 वर्ग किलोमीटर था। अतिक्रमण के चलते अब यह सात वर्ग किलोमीटर में सिमट कर रह गया है। अब गोरखपुर नगर निगम इसका विकास करने पर जुटा हुआ है। रामगढ़ताल के चारों तरफ से अतिक्रमण को हटाया जा रहा है।