उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के लिस्टेड माफिया पूर्व एमएलसी रामू द्विवेदी को पुलिस ने गिरफ्तार किया किसी और केस (अपराध संख्या 2228/12 ) में और जेल भेज दिया किसी दूसरे केस (अपराध संख्या-2230/12) में। सदर कोतवाली पुलिस द्वारा इस मामले में कोर्ट में जमा किए गए दस्तावेज में यह हकीकत दर्ज है। इस हाई प्रोफाइल केस में यह बड़ी गलती हुई या बड़ा खेल, इसको लेकर ढेरों सवाल खड़े हो गए हैं। पुराना रिकॉर्ड गवाह है कि वादी के अनुरोध पर इस मामले में आठ साल पहले फाइनल रिपोर्ट लगाते वक्त भी पुलिस ने कुछ ऐसा ही किया था।
पूर्व एमएलसी रामू द्विवेदी के केस में फंसा पेंच: माफिया की गिरफ्तारी हुई किसी और केस में, जेल गए दूसरे में
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अब साढ़े आठ वर्ष बाद मामला फिर से खुला तो पुलिस ने पूर्व एमएलसी रामू के नाम दर्ज अपराध संख्या 2228/12 के बजाए उन्हें अपराध संख्या 2230/12 में गिरफ्तार किया। पुलिस ने अपराध संख्या को नजरंदाज कर फिर उसी गलती को दोहरा दिया। यही नहीं, पुलिस ने नकल रपट में अपराध संख्या 2228/12 दर्ज किया, जबकि कोर्ट की रिमांड शीट अपराध संख्या 2230/12 में तैयार कर पूर्व एमएलसी को जेल भेजा गया।
इतना ही नहीं, अग्रिम विवेचना के लिए कोतवाल ने जो प्रार्थनापत्र न्यायालय में दिया है, उसमें भी अपराध संख्या 2230/12 लिखा है। इस पर किसी भी पुलिस के अधिकारी की नजर नहीं पड़ी। यहां तक कि अभियोजन अधिकारी ने भी इस पर ध्यान नहीं दिया और कागजात न्यायालय में पेश कर दिया। अपराध संख्या 2230/12 में क्या ब्योरा दर्ज है, फिलहाल इस पर पुलिस ने होंठ सी लिए हैं।
अभियुक्त को मिलेगा लाभ
अभियोजन से जुड़े अधिकारियों एवं कानून के अन्य जानकारों का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई अवैधानिक है। इससे अभियुक्त को लाभ मिलेगा। मामला पुलिस के गले की फांस बन सकता है। अधिवक्ता अजय राय का कहना है कि ऐसा पहली बार देखने को मिल रहा है कि पुलिस ऐसा खेल भी करती है। यह मामूली चूक नहीं है। अधिवक्ता रमेश सिंह का कहना है कि यह अवैधानिक कार्रवाई है। इसमें जो भी विवेचक एवं अन्य अधिकारी हैं, उन पर कार्रवाई हो सकती है।