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Gorakhpur Flood: चारों तरफ पानी, फिर भी पीने के पानी को तरस रहे लोग
Sat, 11 Sep 2021 02:15 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Sat, 11 Sep 2021 02:15 PM IST
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गोरखपुर में बाढ़।
- फोटो : अमर उजाला।
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गोरखपुर में राप्ती की बाढ़ से चारों तरफ से घिरे बहरामपुर गांव के लोगों की हालत आजकल जल बिच मीन पियासी वाली हो गई है। इनके चारों तरफ पानी ही पानी है, लेकिन पीने के लिए पानी नहीं है। बाढ़ के पानी से नहाने और बर्तन धोने का काम तो हो जाता है, मगर पीने के पानी के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ती है। लोगों को अपनी जुगाड़ वाली नाव से बांध तक जाना पड़ता है तब जाकर पीने का पानी मिल पाता है।
गोरखपुर में बाढ़।
- फोटो : अमर उजाला।
हरबर्ट बांध के किनारे बसे बहरामपुर गांव में करीब 50 घर ऐसे हैं, जो हर साल बाढ़ के पानी से घिर जाते हैं। पानी का रंग देखकर नदी की चाल भांप लेने वाले इन लोगों ने अगस्त के अंतिम सप्ताह में बाढ़ आने के बावजूद अपना घर नहीं छोड़ा। बाढ़ में डूबे घर में रह रही बासमती और मंसा ने बताया कि अचानक पानी बढ़ा तो बाहर निकलना मुश्किल हो गया। घर की पहली मंजिल तक पानी है।
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गोरखपुर में बाढ़।
- फोटो : अमर उजाला।
पांच रुपये देकर चार्ज कराते हैं मोबाइल फोन
बाढ़ के पानी के बीच रह रहे 50 से अधिक परिवारों के लोग बिजली संकट भी झेल रहे हैं। बाढ़ को देखते हुए बिजली आपूर्ति रोक दी गई है। लिहाजा ये लोग बांध पर आकर मोबाइल चार्ज करते हैं। दोपहर बाद हर घर का एक सदस्य अपने घर के बाकी सदस्यों का मोबाइल चार्ज करने के लिए बांध पर आता है। इसको देखते हुए कुछ दुकानदारों ने कई चार्जिंग प्वाइंट लगा दिए हैं। दुकानदार पांच रुपया लेकर एक मोबाइल चार्ज कर रहे हैं।
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बाढ़ के पानी के बीच रह रहे 50 से अधिक परिवारों के लोग बिजली संकट भी झेल रहे हैं। बाढ़ को देखते हुए बिजली आपूर्ति रोक दी गई है। लिहाजा ये लोग बांध पर आकर मोबाइल चार्ज करते हैं। दोपहर बाद हर घर का एक सदस्य अपने घर के बाकी सदस्यों का मोबाइल चार्ज करने के लिए बांध पर आता है। इसको देखते हुए कुछ दुकानदारों ने कई चार्जिंग प्वाइंट लगा दिए हैं। दुकानदार पांच रुपया लेकर एक मोबाइल चार्ज कर रहे हैं।
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शम्भू व हरिकेश।
- फोटो : अमर उजाला।
बोले, बाढ़ पीड़ित-
- शम्भू ने बताया कि बाढ़ से घिरे घर में सबसे बड़ी दिक्कत पेयजल को लेकर है। दो दिन तक घर में बोतल में रखे पानी से सभी सदस्यों ने किसी तरह काम चलाया। बाद में जुगाड़ की नाव बनाकर बाहर निकले, तब जाकर पीने का पानी मिला।
- हरिकेश ने बताया कि बाढ़ का पानी हर साल हमारे घरों में भर जाता है। पानी तेजी से उतर भी जाता है, लेकिन इस साल पानी कम नहीं हो रहा है। तीन दिन में ही पानी बांध को छूने लगा था, जबकि पांच दिन में अभी दो से तीन फीट पानी कम हुआ है।
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अमरावती व सोनू।
- फोटो : अमर उजाला।
- सोनू ने बताया कि घर के चारों तरफ पानी भरा है, लेकिन पीने का पानी लेने बांध पर जाना पड़ता है। घर का हैंडपंप भी बाढ़ में डूबा हुआ है। ट्यूब की नाव बनाए हैं, जिसके सहारे रोजाना 20 लीटर पानी की बोतल लेकर आते हैं। अगले 24 घंटे उसी से काम चलता है।
- अमरावती ने बताया कि बांध पर रहने की जगह नहीं है, लिहाजा बाढ़ से डूबे घर में ही रहने की मजबूरी है। बाढ़ के पानी से ही कपड़ा-बर्तन धोने से लेकर नहाने तक का काम चलता है। बाढ़ आने के बाद पहले चार दिन तक तो इसी पानी को छानकर पीना भी पड़ा था।