गोरखपुर जिले में डेंगू के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। सोमवार को हुई जांच में डेंगू के पांच मरीज मिले हैं। इनमें तीन महिलाएं और दो पुरुष हैं। 13 साल के एक बच्चे में भी डेंगू की पुष्टि हुई है। इसके बाद से डेंगू के मरीजों की कुल संख्या 190 पहुंच गई है। इसमें नगर निगम क्षेत्र में 117 और ग्रामीण क्षेत्र के 73 मरीज हैं। मौजूदा समय में 13 मरीज शहर के अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती हैं।
Dengue Alert: गोरखपुर में मिले पांच डेंगू संक्रमित, 190 पहुंची कुल मरीजों की संख्या
निदेशक परिवार कल्याण डॉ. संगीता श्रीवास्तव डेंगू मरीजों जांच, दवाओं की उपलब्धता और बेडों की संख्या जानने के लिए सोमवार को जिले में पहुंची थी। उन्होंने 100 बेड टीबी अस्पताल और चौरीचौरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण किया।
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डेंगू मरीजों की जांच और दवाओं की उपलब्धता की ली जानकारी
सबसे पहले वह 100 बेड टीबी अस्पताल पहुंचीं। वहां मरीजों को न देखकर, कारण पूछा। बताया गया कि मरीजों की संख्या बढ़ने पर इस अस्पताल का इस्तेमाल किया जाता है। उन्होंने अस्पताल के संसाधन देखे। इसके बाद वह चौरीचौरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गईं, जहां पीडियाट्रिक आईसीयू, डेंगू वार्ड की व्यवस्था का मुआयना किया। दवाओं की उपलब्धता की जानकारी ली।
बताया गया कि एनएस-वन किट से जांच के बाद डेंगू के मरीज की एलाइजा जांच कराई जा रही है। जिला अस्पताल में 20 बेड बनाए गए हैं, जहां पर मौजूदा समय में आठ मरीज भर्ती हैं। इस मौके पर एसीएमओ डॉ एके चौधरी, जिला मलेरिया अधिकारी अगंद सिंह आदि मौजूद रहे।
कीवी, बकरी के दूध और पपीते से नहीं बढ़ते हैं प्लेटलेट्स
डेंगू के तेजी से बढ़ रहे हैं। राहत की बात है कि जिले में अब तक डेंगू से एक भी मरीज की मौत नहीं हुई है। लेकिन, इन सबके बीच मरीजों में यह भ्रम तेजी से फैल रहा है कि कहीं प्लेटलेट्स कम न हो जाए, इसके लिए वे पपीता, उसका पत्ता, कीवी और बकरी के दूध का सेवन कर रहे हैं।
जबकि, डॉक्टरों के मुताबिक इनके सेवन से केवल शरीर में इम्युनिटी बढ़ती है, प्लेटलेटस नहीं बढ़ते। जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि फल, गाय या बकरी के दूध में पोषक होते हैं। इनके सेवन से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है पर प्लेटलेट्स में कोई फर्क नहीं पड़ता।
प्लेटलेट्स रक्त में मौजूद कणिकाएं होती हैं। प्लेटलेट्स कम होने की एक बड़ी वजह यह भी है कि लोग बुखार होने पर बिना जांच के दर्द की दवाओं का इस्तेमाल करते हैं। बताया कि कुछ निजी अस्पताल प्लेटलेट्स के नाम पर महंगी दवाएं भी लिख रहे हैं।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अमरेश सिंह ने बताया कि दवाओं से प्लेटलेट्स नहीं बढ़ते हैं। खून में प्लेटलेट्स खुद से बनने शुरू हो जाते हैं। इसलिए डेंगू मरीजों को घबराने की जरूरत नहीं है। बताया कि कीवी, बकरी का दूध और पपीता शरीर को पोषक तत्व पहुंचाते हैं, लेकिन इनके अधिक सेवन से नुकसान भी पहुंच सकता है। इसलिए डेंगू के मरीज डॉक्टरों की सलाह पर ही दवा और अन्य खाद्य पदार्थों का सेवन करें।
20 हजार से कम होने पर प्लेटलेट्स चढ़ाने की जरूरत
जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ राजेश कुमार ने बताया कि डेंगू मरीजों का इलाज जिला अस्पताल में चल रहा है। अब तक केवल तीन से चार मरीजों को ही प्लेटलेट्स चढ़ाने की जरूरत पड़ी है। जबकि, निजी अस्पताल मरीजों को लगातार प्लेटलेट्स चढ़ाने का दबाव बना रहे हैं। इसकी वजह से मरीज के तीमारदार ब्लड बैंकों में प्लेटलेट्स के लिए परेशान हैं। जबकि, प्लेटलेट्स चढ़ाने की जरूरत 20 हजार से कम होने पर पड़ती है।