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सूर्य की ओर बढ़ रहा धूमकेतु, आसमान में होगी आतिशबाजी, देखें तस्वीरें

Tue, 19 May 2020 03:49 PM IST
vivek shukla विवेक सिंह, गोरखपुर।
विवेक सिंह, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Tue, 19 May 2020 03:49 PM IST
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fireworks will in sky after Comet moving towards Sun
Tail star - फोटो : Social media

कोरोना संकटकाल के दौरान खगोलीय घटनाओं में इजाफा हुआ है। उल्कापिंड की बरसात, सुपरमून, बृहस्पति और चंद्रमा का करीब आना और धरती के करीब से गुजरने वाले माउंट एवरेस्ट जितने बड़े खगोलपिंड सरीखी घटनाओं के बाद 27 मई को एक बार फिर आसमान में हलचल होगी। जब धूमकेतु (कॉमेट) स्वान एक करोड़ 10 लाख मील लंबी पूछ के साथ सूर्य के सबसे नजदीक से गुजरेगा। इससे हरे रंग का प्रकाश निकलता हुआ नजर आएगा। इसकी पूंछ नीले रंग की होगी, जो आसमान में किसी आतिशबाजी जैसी दिखेगी। इस तरह की खगोलीय घटना 11597 साल में एक बार होती है।

fireworks will in sky after Comet moving towards Sun
Tail star - फोटो : Social media

वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला के खगोलविद अमर पाल सिंह के मुताबिक 13 मई की रात में ये धूमकेेतु स्वान धरती के बेहद करीब से गुजरा था। अब 27 मई को यह सूर्य के करीब होगा। भारत के लोग इसे दूरबीन या टेलीस्कोप की मदद से सूर्योदय से पहले देख सकेंगे। सूर्य के करीब आने के साथ ही साथ इसकी रोशनी में भी इजाफा हो रहा है। हालांकि सूर्य के समीप आने के साथ ही साथ इसके अस्तित्व पर खतरा बढ़ता जाएगा। 27 मई को यह सूर्य के सबसे नजदीक होगा। उस समय सौर ताप भी अपने चरम पर होगा, अगर यह धूमकेतु सूर्य से बचकर निकल जाता है तो इसका प्रकाश और तेज होगा।

fireworks will in sky after Comet moving towards Sun
Tail star - फोटो : Social media

क्या होता है धूमकेतु
धूमकेतु सौरमंडल के बाहर पाए जाने वाले मूल रूप से पत्थर, धूल, बर्फ, जलकणों, चट्टानों, धातुई पिंड और गैस के बने हुए टुकड़े होते हैं। ये अंडाकार और अति परवलयाकार पथ पर घूमते हुए सूर्य की परिक्रमा करते हैं। जिन्हें हम कुछ दिनों से लेकर महीनों तक आसमान में साधारण आंखों से चमकीले रूप में देख सकते हैं। छोटे पथ वाले धूमकेतु सूर्य की परिक्रमा एक अंडाकार पथ में लगभग 6 से 200 साल में एक बार पूरी करते हैं। कुछ धूमकेतु का पथ वलयाकार होता है और वो अपने पूरे जीवनकाल में मात्र एक बार ही दिखाई देते हैं। लंबे पथ वाले धूमकेतु अक्सर एक परिक्रमा करने में हजारों वर्ष लगाते हैं।

 

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fireworks will in sky after Comet moving towards Sun
Tail star - फोटो : Social media

दिखाई नहीं देते हैं धूमकेतु
धूमकेतु का निर्माण सौरमंडल के बाहर स्थित काइपर बेल्ट में मौजूद ऊट क्लाउड से होता है। धूमकेतु हमारे सौरमंडल के स्थायी सदस्य होते हैं। इनकी घूर्णन की कक्षा पृथ्वी की कक्षा से बाहर की होती है, इसलिए ये दिखाई नहीं देते हैं।   

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fireworks will in sky after Comet moving towards Sun
Tail star - फोटो : अमर उजाला।

बर्फ, कार्बन डाई ऑक्साइड और मिथेन से होता है तैयार
अधिकतर धूमकेतु बर्फ, कार्बन डाई ऑक्साइड, मिथेन, अमोनिया तथा अन्य पदार्थ जैसे सिलिकेट और कार्बनिक मिश्रण के बने होते हैं। इन्हें सामान्य भाषा में पुच्छल तारा भी कहा जाता है क्योंकि इनके पीछे उक्त तत्वों की लंबी पूंछ जैसी आकृति बनी होती है, जो सूर्य के प्रकाश से चमकती रहती है। धूमकेतू का नजर आना अपने आप में दुर्लभ घटना है क्योंकि ये कई बरसों में एक बार नजर आते हैं।

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