पूर्वांचल का कुख्यात अपराधी चंदन सिंह जेल के अंदर 'गन से मन की ओर' नाम की किताब लिख रहा है। हालांकि इसे लिखने की प्रेरणा उसे गौतमबुद्ध नगर के जेल अधीक्षक से मिली थी। कभी जिसके हाथों में गन के खौफ से हर कोई सहमा रहता था जल्दी ही उनके हाथों में इसकी लिखी किताब होगी। चंदन और कानपुर का बदमाश विकास दुबे दोनों में एक समानता है। आगे की स्लाइड्स में पढ़िए चंदन की कहानी...
विकास दुबे की तरह इस बदमाश के नाम भी दर्ज हैं 60 आपराधिक मुकदमें, अब जेल में लिख रहा 'किताब'
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नोएडा जेल अधीक्षक विपिन मिश्रा ने अमर उजाला से फोन पर अपने अनुभव को साझा किया। बताया कि दो साल पहले जब चंदन जेल में आया था तो उस समय उसकी जेल से भागने से लेकर अन्य अपराधों की चर्चा आम थी। सुनने पर लगा कि आखिर इतना कुख्यात अपराधी कौन है, चलकर मिला जाए। उससे पहली मुलाकात में ही अपराध के जीवन के उसके अच्छे-बुरे कारनामों की कहानियां सुनी।
इसके बाद उससे उसकी जीवनी को कागज में उतारने के लिए कहा। इसके बाद से ही चंदन ने शांत मन से इसे स्वीकार कर लिया। किताब लिखने की बात से उसके मन में बेचैनी थी। क्या लिखें, कैसे लिखें? जब उसे बताया कि आखिर उसका अपराध में आना कैसे हुआ, अपराधी जीवन में आकर क्या पाया, क्या खोया? खुद सोचे। इसके बाद ही उसने अपनी आपराधिक जीवनी को लिखने का प्रण किया। उसकी किताब का नाम अभी फिलहाल 'गन से मन की ओर' है। किताब अभी पूरी नहीं लिखी जा सकी है। जल्दी ही उसे पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद इसके नाम को पूरी तरह से फाइनल किया जाएगा।
चंदन पर भी दर्ज हैं 60 आपराधिक मुकदमे
गौतमबुद्ध नगर जेल में बंद चंदन पर 60 आपराधिक मुकदमें दर्ज हैं। इससे इसके अपराध के प्रति उसकी संलिप्तता का अंदाजा लगाया जा सकता है। बृहस्पतिवार की रात 2 बजे कानपुर ग्रामीण के चौबेपुर में हुए एनकाउंटर के आरोपी विकास दुबे पर भी 60 आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं।
गुजरात से हुई थी गिरफ्तारी
चंदन की 2017 में गुजरात से यूपी एसटीएफ ने गिरफ्तारी की थी। इसके बाद अलग-अलग जेलों से होकर नोएडा जेल लाया गया था। जेलर सत्य प्रकाश सिंह ने बताया कि चंदन यूपी की 24 जेलों की यात्रा के बाद नोएडा जेल आया है। दो बार अलग-अलग जेल से भाग चुका है।